अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
DevanagariHindipublished297 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 137इस प्रकार के समाचारों को सुनकर मैंने सबको एकत्रित कर खूब
इस प्रकार के समाचारों को सुनकर मैंने सबको एकत्रित कर खूब
फटकारा। उस समय सब अपनी त्रुटि समझकर पछताए और प्रेमपूर्वक
आपस में मिलकर सारे कार्य करने लगे। पर ऐसी अवस्था हो गयी थी
कि दल गुटबन्दी का शिकार हो गया था। इस पर भी मुझ पर सबकी
श्रद्धा थी और मेरी बात को सब मान लेते थे। इतना सब कुछ होने पर
भी मुझे किसी प्रकार का संदेह न था। किन्तु परमात्मा को ऐसा ही
स्वीकार था, जो इस अवस्था का दर्शन करना पड़ा।''¹
काकोरी काण्ड से अशफाक का कृतित्व स्पष्ट होकर दिखता है।
अशफाक की दूरदर्शिता और उनका भीमबल निश्चित ही दृष्टिगत होता है।
अब पछतावा होता है कि काश अशफाक इस काण्ड से अपने को रोक
लिए होते। अशफाक के एक-एक कथन सत्य साबित हो रहे थे और
निश्चित ही क्रांतिकारी अपने पैरों में कुल्हाड़ी मार चुके थे। यह जोश में
आकर होश खोने जैसा था। अशफाक ही एक ऐसे क्रान्तिकारी व्यक्ति थे,
जो हमेशा सचेत रहते थे, उनके लिए जोश में आकर होश खोने वाली
कोई बात नहीं थी। बाद के इतिहास ने सिद्ध कर दिया कि अशफाक सही
थे और अन्य क्रांतिकारियों का निर्णय नितांत आत्मघाती था। बहुमत की
बात भले हो किन्तु यह सत्य हो अथवा उचित हो कोई आवश्यक नहीं है।
बहुमत से अल्पमत या एक व्यक्ति की बात भी सत्य अथवा कल्याणकारी,
उपयोगी सिद्ध होती है। .............निश्चित ही हमें अशफाक के मानसिक बल की
भी पहचान होती है।
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-73
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