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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 116, कुल 297 में से

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पृष्ठ 116

अध्याय-छ:
काकोरी काण्ड
शचीन्द्रनाथ सन्याल का यह कथन सत्य है कि क्रांतिकारियों ने
राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक तथा पूरक भूमिका
निभायी।¹ वे कांग्रेस द्वारा चलाये गये आन्दोलनों में बाधक भी नहीं
बने। विचारधारा भिन्न जरूर थी। क्रान्तिकारियों ने अपने शौर्यपूर्ण कार्यों
व बलिदानों से जनता में राष्ट्रीय चेतना और जुझारू संघर्ष की भावना
जागृत की।
अशफाक क्रांतिकारियों के गुप्त संगठन 'हिन्दुस्तान गणतांत्रिक संघ'
के सक्रिय सदस्य थे। यही एक ऐसा काण्ड था, जिससे अशफाक को दल
की पूर्ण समस्याओं और कार्यप्रणाली से परिचित होने का अवसर मिला।
स्पष्ट था कि क्रांतिकारी संगठनों के पास धन की समस्या थी। कमजोर
अर्थ पक्ष गतिविधियों को प्रभावित कर रहा था। हिन्दुस्तान गणतांत्रिक
संगठन को भी धनाभाव की विषम परिस्थितियों से गुजरना होता था।
आय का कोई अन्य रास्ता न था। यह भी कहा जा सकता है कि आय
के ठोस स्रोत न होने के कारण आर्थिक समस्याएं क्रांतिकारी संगठन की
असफलता का कारण थीं। राम प्रसाद बिस्मिल ने लिखा है कि - “.......
.........जब कार्य प्रारम्भ हो गया और असहयोग को टटोला गया तो वे
आन्दोलन से कहीं अधिक शिथिल हो चुके थे। उनकी आशाओं पर पूरी
तरह पानी फिर चुका था। अपने पास की पूंजी समाप्त हो चुकी थी। घर
में फाकें हो रहे थे। आगे की भी कोई विशेष आशा नहीं थी। कांग्रेस में
भी स्वराज्य दल पर जोर हो गया था। जिनके पास कुछ धन तथा इष्ट
मित्रों का संगठन था, वे कौंसिल तथा असेम्बली के सदस्य बन गये थे।

  1. स्वतंत्रता आन्दोलन में शाहजहाँपुर का योगदान, पृष्ठ-106 - डॉ०एन०सी०
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