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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 613

८ आल्हखण्ड । ६१२
घर घर दिल्ली को लुटवैबै तब छाती का डाह बुताय ७०
इतना कहिकै लाखनिराना तुरतै लीन्यो तीर उठाय ॥
खैंचि कमनियांते छाँड़त भे गौरा पारवती को ध्याय ७१
आवत दीख्यो शर लाखनिको राजा काटि तड़ाका दीन ॥
बड़े क्रोधसों पृथ्वीराजा दूसर बाण हाथमें लीन ७२
शर संधान्यो बड़े वेगसों मार्यो तुरत पिथौराराय ॥
खण्डन कीन्ह्यो त्यहि लखराना आपो मार्यो तीर चलाय ७३
ताहि पिथौरा खण्डन करिकै यकइस मारे बाण रिसाय ॥
तिनको खण्डन लाखनिकीन्ह्यो राजा गये मनै शर्माय ७४
यहु महराजा कनउज वाला आला वंश चंदेलाराय ॥
धेला एको ज्यहि डर नाहीं हाथिन हेला दीन गिराय ७५
बड़ बड़ मेला रजपूतन के रणमा लाखनि दीन हटाय ॥
फूल चमेला औ बेला जस तस अलबेला कनौजीराय ७६
उठै सुगंधै जस बेला में तस यशगयो जगतमें छाय ॥
बाण लागि गा लखराना के हौदा उपर गये मुरझाय ७७
जूझि कनौजी गे खेतन में सुमिरिकै मित्र बनाफरराय ॥
कड़कै धड़कै औ फड़कै अति मेचा आसमान थहराय ७८
प्रलयकाल की बेला आई जब मरिगये कनौजीराय ॥
ऐसे अशकुन के देखत खन ऊदन गये सनाकाखाय ७६
चित्त न लागै कछु मुर्चा में व्याकुल सुमिरि कनौजीराय॥
यहां चौंडिया धरि धरि धमकै ऊदन लेवैं वार बचाय ८०
हाथ चौंड़िया पर छाँड़ै ना ब्याकुल चित्त रहे अकुलाय ॥
तहिले धावन इक चौंड़ाते लाखनि हाल बतावाआय ८१
सुना बनाफर उदयसिंह यह की मरिगये कनौजीराय ॥