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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 598

चन्दनखम्भाकामंदान । ५६७ ३
भा खलभल्ला औ हल्ला तब लोगन दीन्ह्यो लागलगाय ॥
मुर्चाबन्दी दुहुँ तरफा ते दूनों तरफ बीर समुहाय ११
मारन लागे तलवारी सों दूनों तरफ बरोबरि आय ॥
अपने अपने सब मुर्चनमा ज्वाननदीन्हे ज्वान गिराय १२
औ ललकारैं फिरि फिरि मारैं अद्भुत समर कहा ना जाय ॥
लिहे जँजीरें हाथी मारैं घोड़ा मारैं टाप चलाय १३
दाँतन काटैं फिरि फिरि डाटैं चाटैं रक्त भूत बैताल ॥
मारि लहाशन के भुइँ पाटैं ल्वाटैं समरशूर त्यहिकाल १४
ह्वातैं लागीं तहँ श्वानन की ज्वानन खूब कीन तलवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १५
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥
खट खट खट खट तेगा बोलै ऊना चलै बिलाइतिक्यार १६
भाला बरछी तीर तमंचा कहुँ कहुँ कड़ाबीनकी मार ॥
छुरी कटारी कउ कउ मारैं कउ कउ बीर रहे ललकार १७
कउ मुखफारैं नखन बिदारैं डारैं चीरि फारि मैदान ॥
कोऊ हारै नहिं काहू सों ज्वाननकीन घोर घमसान १८
परशूठाकुर लाखनि दिशि को अंगद नृपतिग्वालियरक्यार ॥
मुर्चाबन्दी भै दूनन कै दूनों लड़न लागि सरदार १६
अंगद मारै तलवारी सों परशू लेय ढालपर वार ॥
परशू मारै तलवारी सों अंगद रोकि लेय त्यहिवार २०
बड़ी लड़ाई भै दूननमा दूनन खूब कीन तलवार ॥
वार चूकिगे अंगद राजा परशू मारिदीन त्यहि वार २१
गिरिगा राजा ग्वालियर का आयो बीर भुगन्ता ज्वान ॥
बीर भुगन्ता के मुर्चा मा परशू खूब कीन मैदान २२