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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 582

बेलाताहरकामैदान । ५८१ १७
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार १७७
को गति बरणै वहि समया कै चहुँदिशि होय भड़ाभड़मार ॥
बड़ा लड़ैया ताहर नाहर यहुदल गंजनपर असवार १७८
मारत मारत रजपूतन को बेला पास पहूँचा आय ॥
जानि चँदेला फिरि ललकार्यो ठाकुर कूच जाउ करवाय १७९
ब्रह्मरूप तब बेला बोली नाहर साँचदेयँ बतलाय ॥
मोहिं झमेलाते मतलबना अधकर यहाँ देउ पहुँचाय १८०
मोहिं जियावा घर बेलाने याही हेतु दीन पठवाय ॥
भिक्षुक हैकै समरभूमि में चाहै आप लेयँ छुड़वाय १८१
ऐसे अधकर यहु छुटि है ना दुइमा एक बंश रहिजाय ॥
इतना सुनिकै ताहर नाहर बोले दोऊ भुजा उठाय १८२
सँभरिकै बैठे अब घोड़े पर ठाकुर खबरदार है जाय ॥
इतना कहिकै ताहर नाहर भालामारा तुरत चलाय १८३
वार बचाई तहँ भाला की बेला खैंचिलीन तलवार ॥
ऐंचि सिरोही बेला मारी ताहर लीन ढालपर वार १८४
यहु इकवन्ता को चढ़वैया चौंड़ा आयगयो त्यहिबार ॥
रूप देखिकै सो बेला का जान्यो सबै कपटव्यवहार १८५
चुरिया खुलिगै इक बेला की सोऊ दृष्टि परी त्यहिबार ॥
चौंड़ा बोला तब ताहर ते यहुनहिंमोहबेकासरदार १८६
बहिनि तुम्हारी यह बेला है तुमते साँच बतावैं यार ॥
इतना सुनिकै ताहर ठाकुर चकितलखनलागत्यहिवार १८७
गाफिल देख्यो जब ताहरको बेला हनी तुरत तलवार ॥
घायल हैगा ताहर ठाकुर बेलाकाटिलीन शिरयार १८८
बड़ा झमेला अब को गावै बेला कूच दीन करवाय ॥