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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 509, कुल 618 में से

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पृष्ठ 509

३६ आल्हाखण्ड । ५०८
कलश सुबरण हौदावाला लीन्ह्यो तुरत बनाफराय १६३
स्याबासि स्याबासि कह्यो पिथौरा पाछे हाथी लीन हटाय ॥
तबै कनौजी मन शरमाने ताहर गयो बरोबरि आय १६४
लाखनि ताहर का मुर्चाभा ऊदन और चौंड़िया ज्वान ॥
धाँधू धनुवाँ कै बरणी भै सय्यद भूरूका मैदान १६५
नदी बेतवाके झावर मा बाजै घूमि घूमि तलवार ॥
ऐसी नाहर कनउज वाले वैसी दिल्लीके सरदार १६६
हौदा हौदा यकमिल हैगा अंकुशभिड़ा महौतनक्यार ॥
पैदल पैदलकै बरणी भै औ असवारसाथ असवार १६७
उरई फौजै दल बादल सों बाजैं छपक छपक तलवार ॥
छुरी कटारी भाला बरछी ऊनाचलै विलाइतिक्यार १६८
तीर तमंचा के मंचा भे भाला बरछिनकेर पगार ॥
मरे कटारिन औ छूरिनके नदिया बही रक्तकी धार १६६
मुएडन केरे मुड़ चौराभे औ रुण्डन के लगे पहार ॥
हिरसिंह बिरसिंह बिरियावाले दोऊ लड़ैं तहाँसरदार १७०
रहिमत सहिमत द्वउ मारेगे हिरसिंह बिरसिंह के मैदान ॥
धाँधू धनुवाँ के मुर्चामा मुर्चा हारिगये चौहान १७१
लाखनि राना के मुर्चामा मरिगे दतिया कें नरपाल ॥
ताहर ठाकुर के मुर्चा मा बेटा देशराजका लाल १७२
तबलौं आये लाखनिराना तिनते फेरि चली तलवार ॥
चढ़ा कनौजी है भूरी पर यहुदलगंजनपरअसवार १७३
तीनि सिरोही ताहर मारी लाखनि लीन ढालपर वार ॥
क्रोधित ह्वैकै लाखनिराना तुरतै कीन्ह्यो गुर्जप्रहार १७४
चोट लागिगै सो घोड़ा के तुरतै भाग सहित असवार ॥

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