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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 502

नदीबेतवाकासमर । ५०१ ६
कालनेमि औ परसू, सिंहा, ताहर साथ सबै सरदार ॥
भूरी हथिनी सों लखराना। गरुई हाँक कीन ललकार ८२
कौन बहादुर है दिल्ली का रोंकै बाट हमारी आय ॥
इतना सुनिकै ताहर जरिगे बोले सुनो कनौजीराय, ८३
तुम्हरे घरते संयोगिनि को दिल्ली वाले लये लिवाय ॥
वई बहादुर पृथीराज हैं गाँस्यनिनगरमोहोबाआय ८४
काह हकीकति कनवजिया कै जो अब धरै अगारी पायँ ॥
हुकुम पिथौरा का नाहीं है ताते कूच देउ करवाय ८५
इतना सुनिकै लाखिनि बोले ताहर काह गये बौराय ॥
लैकै बिटिया चेरी घरकै रानी कीन पिथौराराय ८६
एकतो बदला है चेरी का दूसर साथ बनाफर क्यार ॥
कसरि न राखै दिल्ली वाले ठाकुर घोड़े के असवार ८७
इतना कहिकै लाखनि राना मारन लाग ढूँढ़ि सरदार ॥
भूरी हथिनी का चढ़वैया नाती बेनचकवै क्यार ८८
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ॥
तैसे पैठ्यो लाखनि राना कोऊ शूर नहीं समुहाय ८६
कायर भागे दुहुँ तरफा ते सायर खूब करैं तलवार ॥
यहु दलगंजन का चढ़वैया ताहर दिल्ली राजकुमार ६०
बहुदल मारै रजपूतन का नंदिया बही रक्तकी धार ॥
छूरी मछली के समसोहैं ढालैं कछुवाके अनुहार ६१
बहैं लहाशैं जो मनइन की तिनपर चढ़े गृद्ध विकराल ॥
बार सिवारा समसोहत हैं चहुँदिशिसोहैंश्वानशृगाल९२
बहै अपारा शोणित धारा मज्जन करैं भूत वैताल ॥
को गति बरणै त्यहि समया कै कागन भई टोंट सब लाल ६३