सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 501, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 501

८ आल्हखण्ड । ५००
हुकुम लगावो अब तोपन को गोलंदाज होयें तय्यार ॥
लखि अस मर्जी सरदारन की लाखनिहुकुमदीनत्यहिबार७०
लै लै थैली बारूदन की सो तोपनमा दई डराय ॥
गोला छूटे दुहुँ तरफा के हाहाकार शब्द गा छाय ७१
लागै गोला ज्यहि हाथी के मानो चोर सेंधि कैजाय ॥
जउने ऊंट के गोला लागै तुरतै गिरै सार अललाय ७२
लागै गोला ज्यहि घोड़ा के मानो मगर कुल्याचै खाय ॥
गोला लागै ज्यहि क्षत्री के धुनकतरूईसरिसउड़िजाय ७३
जउने रथमा गोला लागै बिजली गिरै वृक्ष जस आय ॥
तैसे चूरण करि स्यन्दन को पहियाधुरी देय अलगाय ७४
फूटै गोला जब ठुकरे मा बिथरैं पाँच खेतलों भाय ॥
गोली निकरैं तिन गोलन ते ओलनसरिसजायँतहँछाय ७५
बोलि न पावैं कोउ ठाकुर तहँ चुप्पे भूमि देयँ पौढ़ाय ॥
बड़ी दुर्दशा भै तोपन मा तब फिरि मारु वन्दहैजाय ७६
दुनों गोल आगे को बढ़िगे रहिगा डेढ़ खेत मैदान ॥
भाला वलछी की मारुन मा व्याकुलभये सिपाहीज्वान७७
शुण्डा कटिगे हैं हाथिन के रुण्डन हैगा ऊंच पहार ॥
कङ्का कटि कटि गिरैं बछेड़ा घैहा होन लागि सरदार ७८
गंगा ठाकुर कुड़हरि वाला पूरन पटना का सरदार ॥
देवी मरहटा दक्षिण वाला अंगदनृपतिग्वालियरक्यार७९
हिरसिंह विरसिंह बिरिया वाले इनके साथ करें तलवार ॥
भुरा मुगलिया काबुल वाला सय्यद बनरस का सरदार ८०
धौंधू धनुवाँ का मुर्त्ता है औ दतियाके बंशगुपाल ॥
चिंता ठाकुर रुसनी वाला गुरखा नृपति शहरबंगाल ८१