आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६ आल्हखण्ड । १८८८
ना मुँह फेरैं कुड़हरि वाले ना ई मोहबे के सरदार ॥
कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि रणमा चलै खूब तलवार २८३
भागि सिपाही कुड़हरि वाले अपने डारि डारि हथियार ॥
गंगा ठाकुर के मुर्चा मा आवा उदयसिंह सरदार २८४
ऍंड़ लगावा तब बेंबुल के हाथी उपर पहुँचा जाय ॥
भाला मारा बघऊदन ने गंगा लैगा वार बचाय २८५
तवलों आये आल्हा ठाकुर हाथी भिड़ा बरोबरि आय ॥
दैकै साँकरि पचशब्दा को तुरतै कैदलीन करवाय २८६
लैकै फौजैं ऊदन ठाकुर कुड़हरिशहर लीन लुटवाय ॥
काछी कुरमी तेली भागे कोरीभागि थानविसराय २८७
दर्जी भुर्जी सब भागे तहँ भागे बड़े बड़े महराज ॥
कौन बखानै त्यहि समयाकै रहिगैनहींक्यहूँकहूँलाज २८८
साँच वातकरि जगनायक कै दीन्ह्यों लूट बन्दकरवाय ॥
लैकै कोड़ा बौना चलिभा आल्हानजरिगुजाराजाय २८६
कोड़ा दीन्ह्यो जगनायक को आल्हा तुर्त तहाँ बुलवाय ॥
कैद छुड़ाय दई गंगा की आदर कियो कन्नौजीराय २६०
लैकै फौजैं गंगा ठाकुर साथै कूच दीन करवाय ॥
चलिभालश्कर कनौजियाका यमुना उपर पहुँचा जाय २६१
मज्जन करि कै श्रीयमुनाजल पाछे शम्भुचरण धरि ध्यान ॥
संध्या तर्पण विधिवत करिकै दीन्ह्योद्विजनतहाँपरदान २६२
कूच करायो श्रीयमुना ते कलपी पास पहुँचे जाय ॥
लैकै फौजैं लाखनिराना कलपीशहरलीनलुटवाय २६३
ऊदन बोले तब लाखनि ते यह्र का कीन कन्नौजीराय ॥
बदले कुड़हरिके लुटवावा मानो साँच बनाफरराय २६४