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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 486

आल्हाकामनावत । ४८५ ५३
लाखनि राना इत हाथी पर वैसी परहुल का सरदार ॥
भाला छूटे असवारन के पैदलचलनलागितलवार २४७
झुके सिपाही दुहुँ तरफा के लागे करन भड़ाभड़ मार ॥
मूंड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार २४८
बड़ी लड़ाई मै परहुल में लाखनि राना के मैदान ॥
लड़ैं सिपाही दुहुँ तरफा के कटि २ गिरैंसुघरूवाज्वान२४९
उठि उठि ठाकुर लरैं खेत में कहुँ कहुँ रुण्ड करैं तलवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार २५०
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठे जैसे अहिर विडारै गाय ॥
तैसे मारै ऊदन ठाकुर सिंहाफौजगई बिललाय २५१
भागीं फौजै जब परहुल की लाखनि हाथी दीन बढ़ाय ॥
लाखनिराना के मुर्चा मा सिंहा आपु पहुँचा आय २५२
सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे दोऊ लड़न लागि सरदार ॥
सिंहा मार्यो तलवारी को लाखनिलीन ढालपरवार २५३
भाला मार्यो लखराना ने नीचे गिरा महाउत आय ॥
बलछी मारा सिंहा ठाकुर लाखनि लैगे वार बचाय २५४
खाली वार परी सिंहा की लाखनि तुरत लीन बँधवाय ॥
जायकै पहुँचे फिरि परहुल मा तुरतै दिया दीन गिरवाय २५५
लैके फौजैं सिंहा ठाकुर संगै कूच दीन करवाय ॥
कोस अढ़ाई कुड़हरि रहिगा डेरा तहाँ दीन डखाय २५६
भैने बोल्यो परिमालिक का मानो कही बनाफरराय ॥
गंगा ठाकुर कुड़हरि वाला कोड़ा घोड़ा लीन चुराय २५७
सवा लाख का सो कोड़ा है जो बनवा राजापरिमाल ॥
महामुशकिलिन घोड़ा दीन्ह्यो कोड़ानहींदीनत्यहिकाल २५८