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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 478

आल्हाकामनावन । ४७७ १५
हनवन कीन्ह्यो गंगजलसों रेशम सारी लीन मँगाय ॥
ओढ़ी सारी काशमीर की चोलीबन्दकसे अधिकाय १५३
पैर महाउर को लगवाग्रो नैनन सुरमा लीन लगाय ॥
कड़ाके ऊपर छड़ा बिराजैं त्यहिपर पायजेब हहराय १५४
पहिरि करगता करिहाँयैमा नई नई चुरियाँ लीन मँगाय ॥
ग्वरिग्वरिबिहियाँ हरिहरिचुरियाँ शोभा कही बून ना जाय १५५
अगे आगेला पिछे पछेला तिन बिच ककना करें बहार ॥
जोसन पट्टी बांधि बज़ुल्ला टाँड़ै भुजन केर श्रृंगार १५६
को गति बरणै तहँ हमेल कै चमकै हार मोतियनक्यार ॥
नथुनी लटकन पहिरिनासिका कानन करनफूलकोथार १५७
गुज्झी पहिरी दोउ कानन में टीका मस्तक करै बहार ॥
बँदिया शिर पर सोनेवाली पैरन बिछिया की झनकार १५८
अनवट पहिरे द्वउ अँगुठन में हाथन लीन आरसीधार ॥
मुँदरी छल्ला सब अँगुरिनमा रानी खूबकीन श्रृंगार १५६
बिदा माँगिकै महतारी ते ह्वाँ चलि दिये कन्नौजीराय ॥
द्वार राखिकै उदयसिंह का रानी महलगये फिरिआय १६०
रानी कुसुमा आवत दीख्यो तुरतै उठी तड़ाकाधाय ॥
पकरिकै बाहू द्वउ प्रीतमकी पलँगा ऊपर लीन बैठाय १६१
पंसासारी को मँगवावा सखियाँ लाईं तुरत उठाय ॥
बड़ी खातिरी करि पदमाकै खेलन लाग कन्नौजीराय १६२
कुसुमा बोली तब लाखनि ते स्वामी हाल देउ बतलाय ॥
किह्यो तयारी तुम कहँना की काहेगयो अचाकाआय १६३
सुनिकै बातें ये पदमा की बोला तुरत कन्नौजीराय ॥
किरिया कीन्ही हम ऊदन ते औबातील गंगमँझाय १६४