आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ आल्हाखण्ड । ४४६
दोऊ मारैं तलवारिन सों दोऊ लेयँ ढाल पर वार ३०
कोऊ काहू ते कमती ना दोऊ रण परा बरोबरि आय ॥
वार चलाई रंजित ठाकुर सूरज लैगा चोट बचाय ३१
सूरज मारा तलवारी का रंजित लीन ढाल पर-वार ॥
रंजित मारा तलवारी का चेहरा काटि निकरिगै पार ३२
सूरज जूझे जब मुर्चा में पहुँचा टंक तुर्तही आय ॥
टंक सामने अभई आये खेलन लागि जूझके दायँ ३३
यहु रणनाहर माहिलवाला गरुई हाँक देय ललकार ॥
टंक शंक तजि त्यहि औसरमा दूनों हाथ करै तलवार ३४
साँँग चलाई नृपति टंक ने अभई लीन्ही वार बचाय ॥
भाला मारा जब अभई ने तोंदी परा घाव सो जाय ३५
टंक औ सूरज दोऊ मरिगे हाहाकार फौज मा छाय ॥
गा हरिकारा फिरि फौजन ते राजै खबरि जनाई जाय ३६
हाल पायकै पृथीराज ने ताहर बेटा लीन बुलाय ॥
मर्दनि सर्दनि को बुलवावा तिनते हालकहा समुझाय ३७
टंक और सूरज दोऊ जूझे कीरतिसागर के मैदान ॥
लाश लयआवो दुउ वीरन की भावी जानि सदा बलवान ३८
हुकुम पायकै महाराजा को डंका तुरत दीन बजवाय ॥
तीन लाखलों लश्कर लैके तुरतै कूच दीन करवाय ३६
कीरतिसागर मदनपालपर ताहर अटा तुरतही धाय ॥
लाश देखिकै दुउ वीरन कै सो पलकी म दीन रखवाय ४०
निकट जायकै दल रंजितके गरुई हाँक कहा गुहराय ।
कौन बहादुर है मोहवे का सूरज टंकै दीन गिराय ४१
डोला दैके चन्द्रावलि का अबहीं कूच देउ करवाय ॥