आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 406, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंगौंजरकीलड़ाई । ४०५ १५
माल खजाना सब लुटवायो डंका फेरि दीन बजवाय ॥
जीति कामरू कामक्षा को तहँते कूच दीन करवाय १५२
जायकै पहुँचे बंगाले में झंडा तहाँ दीन गड़वाय ॥
बजे नगारा तहँ आल्हा के नभऔअवनिशब्दगाछाय१५३
गा हरिकारा तब जल्दी सों राजै खबरि सुनावा जाय ॥
भारी फौजै क्यहु राजा की डाँड़े परीं हमारे आय १५४
सुनिकै बातें हरिकारा की राजा गयो सनाकाखाय ॥
देखन पठवा क्यहु अफसर को त्यहिसबखबरिसुनावाआय १५५
गुरुखा राजा बंगाले का मन्त्रिन बोला बचन सुनाय ॥
तुरत नगाड़ा को बजवावो सबियाँफौजलेउसजवाय १५६
हुकुम पायके महराजा का सबियाँ फौज भई तैयार ॥
पहिल नगाड़ा मा जिनबंदी दुसरे फाँदिभये असवार १५७
हथी अगिनियाँ महराजा को सोऊ बेगि भयो तय्यार ॥
सुमिरि भवानी जगदम्बा का राजा तुरत भयो असवार १५८
ढाढ़ी करखा बोलन लागे बिप्रन कीन बेद उच्चार ॥
रणकी मौहरि बाजन लागीं रणकाहोनलागब्यवहार १५६
पांच घरी के फिरि अर्सा मां राजा गयो समर में आय ॥
घोड़ बेंदुला को चढ़वैया यहु रणबाधु बनाफरराय १६०
सम्मुख आवो महराजा के औ यह बोला भुजा उठाय ॥
बारह बरसन की बाकी अब राजन आप देउ मँगवाय१६१
लाखनि आये हैं कनउज ते आल्हा ऊदन साथ लिवाय ॥
छोटे भाई हम आल्हा के ऊदन नाम हमारो आय १६२
इतना सुनिकै गुरुखा राजा बोला महाक्रोध को पाय ॥
टरिजा टरिजा रे सम्मुख ते नहिंशिरदेवों भूमिगिराय १६३