आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 384, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंलाखनिका विवाह । ३८३ :१७
सुमिरन ॥
बेदन ध्यावों सामबेद को बिप्रन परशुराम महराज ॥
क्षत्रिन ध्यावों रामकृष्ण को बैश्यन नन्दभये शिरताज १
शूद्रन ध्यावों मैं निषाद को कीशन पवनतनय बलवान ॥
ईशन ध्यावों शिवशङ्कर को शीशनबढ़ा दशानन ज्वान २
ध्याय नदीशनमें बड़वानल पक्षिन बैनतेय महराज ॥
ध्याय गिरीशन में हिमपर्वत नारिन जनकसुता शिरताज ३
कुँवारिन ध्यावैं हम राधाको राखैं सदा हमारी लाज ॥
परम पियारी यदुनन्दन की हमरी माननीय शिरताज ४
सबै पुस्तकन में दुर्गा जी अबहूं बिप्रन की रखवार ॥
खूटि सुमिरनी गै ह्याँते अब बूँदी हाल सुनो यहिबार ५
अथ कथाप्रसंग ॥
देखिकै फौजै मलखाने की बोला तुरत कनौजीराय ॥
फौजै आई हैं बूँदी ते आल्हा देखु भीर अधिकाय १
चिट्ठी पठई तुम सिरसा को आये नहीं वीर मलखान ॥
कैसी करिहौ यहि समया में आल्हा समरभूमि मैदान २
सुनिकै बातैं महराजा की आल्हा बोले शीश नवाय ॥
मुर्चा बन्दी अब करवावो चर्खन तोप देउ चढ़वाय ३
तर्बलंग धावन सिरसावाला आल्हा फौज पहुंचा आय ॥
शीश नाय कै सो आल्हा को मलखे आवन दीन बताय ४
दीन इनामै त्यहि धावन को ब्रह्मा मलखे लीन बुलाय ॥
खबरि पाय कै सो आल्हा की दूनों गये तहाँ पर आय ५
बड़ी खातिरी जैचँद कीन्ह्यो अपने पास लीन बैठाय ॥
खबरि बताई सब बूँदी की जयचँद बार बार पछिताय ६