सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 334, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 334

इन्दलहरण । ३३१ १५
करौं तरंग यहाँ सों पूरण तवपद सुमिरि भवानीकन्त ॥
शम रमा मिलि दर्शन देवो इच्छा यही मोरि भगवन्त १४७
इति श्रीलखनऊनिवार्सि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू
प्रयागनारायणजीकीआज्ञानुसार उन्नामदेशान्तर्गतपँड़रीकलां
निवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनुपण्डितललिताप्रसाद
कृतऊदननरवरगमनवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
सवैया ॥
कौनफली सबकाल बली यहि पुण्यथलीमनमाँझ बिचारा ।
निंदिकै काहि बखानकरौं क्यहि कौनसों बैरकरौं यहिब्वारा ॥
याहि लियों ठहराय मनै प्रभु एकसों एक हैं देव उदारा ।
बेद पुराण बतावत हैं ललिते सब ते बढ़िकै ॐकारा १
सुमिरन ॥
इकलो अक्षर ॐकार को अब हम शिरसों करें प्रणाम ॥
ब्रह्मा विष्णू औ शिवशंकर दुर्गा केर ताहि में धाम १
एक मात्रा में शिवशंकर दुर्गा अर्द्ध करें विश्राम ॥
एक मात्रा में ब्रह्माजी एक म रहें हमारे राम २
इकलो अक्षर यहु जो ध्यावै पूरण होयँ तासु के काम ॥
यहिते बढ़िकै हिन्दूमत में दूसर नहीं बेद में नाम ३
अज अविनाशी घट घट वासी पूरण ब्रह्म चराचर राम ॥
बेद व्याकरण दोउ साखी हैं खण्डनकरै कौन यह नाम ४
नाम न रहै जब दुनियाँ मा तब सब होइहैं पशू समान ॥
कीरति गावों बघऊदन कै सुनिये खूब ध्यान धरिज्ञान ५
अथ कथाप्रसंग ॥
उदयदिवाकर भे पूरब में किरणनकीन जगत उजियारा।
सोयकै जागे बघऊदन तब प्रातःकृत्य कीन सरदार १