सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 320, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 320

अथ आल्हखण्ड ॥
बलखबुखारे की लड़ाई अथवा इन्दल
हरण व विवाह वर्णन ॥
सवैया ॥
बाजत झांझ मृदंग तहाँ औ सबै मुरचंगनसों स्वर गावैं ।
बाजत तार सितारनके यकत इनकी गति कौन बतावैं ॥
राजत बीण तहाँ तबला अवर जहँ झुंडन झुंडन आवैं ।
गाजत कृष्ण तहाँ ललिते अब जहाँ शिव गोपीरूप बनावैं १
सुमिरन ॥
मैया भैया और बपैया सब दिशि देखा खूब निहार ॥
बिना चरैया गैयावाला दैया कौन होय रखवार १
बूड़ै नैया भवसागर में कोउ न मिलै खिवैया हाल ॥
मैया यशुमति केर कन्हैया भैया साँच कहैं सुरपाल २
पारलगैया म्वरि नैया के गैयापाल कृष्ण महराज ॥
और खेवैया को नैया का जाकीशरण लेयँ हम आज ३