सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 29

२४ आल्हखण्ड ।
सवैया ॥
हे मममातु बिदेह कुमारि खरारि किनारि पियारि पिताकी ।
जेऊ गये शरणागत में सुखि तेऊभये वसुधामें पताकी ॥
अन्तसमय स्वइ ऐसे भये जिनकी शरणागत इन्द्रहुताकी ।
दीन पुकार करै ललिते बलितेऊहौं जाऊं बिदेह सुताकी १
सुमिरन ॥
काली ध्यावों कलकत्ते की शारद मइहर की सरनाम ॥
बिन्ध्यवासिनी के पद ध्यावों ज्वालामुखिको करों प्रणाम १
देबी चण्डिका बकसरवाली तिनके दोऊ चरण मनाय ॥
देबी कुसेहिरी औ दुर्गा को ध्यावों बार बार शिरनाय २
महाकाल शिव उज्जैनी के जिनकाबिदितजगतपरताप ॥
तिनके दर्शन के कीन्हे ते छूटत नरन केर सब ताप ३
मैं पद ध्यावों शिवशंकर के काशी विश्वनाथ महराज ॥
जिनके दर्शन के कीन्हे ते अवहूं रहत जगत में लाज ४
फेरि मनावों रामेश्वर को पशुपतिनाथ क्यारकरिध्यान ॥
बैजनाथ लोधेश्वर गावों पावों बुद्धि और बल ज्ञान ५
छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाखा सुनो शूरमन केर ॥
फौजैं सजिहैं चन्देले की कनउज लेई पिथौरा घेर ६
अथ कथाप्रसंग ॥
भयो आगमन जब सुर्यन को पक्षिन कीन बहुत तब शोर ॥
मुर्गा बोले सब गाँवन में जंगल नचनलाग तब मोर १
जगानगड़ची फिर कनउजमाँ करिकै कृष्णचन्द्र को ध्यान ॥
धरा नगाड़ा फिरि सँड़ियापर बाजन लाग घोर घमसान २
शब्द नगाड़ा का सुनतैखन खत्री सबै भये हुशियार ॥