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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 282

उदयसिंहका विवाह । २७६ ४१
जायके छांड़्यो राजा सबको तम्बु गयो यऊ सब आय १०८
साइति शोधी चूड़ामणि ने आल्है खबरि दीन पहुँचाय ॥
कालिह सबेरे भौंरी हैहैं नरपति खबरिगये यहपाय १०९
इतना सुनिकै माहिल चलिभा लिल्ली घोड़ीपर असवार ॥
जायकै पहुँचा नरवरगढ़ में जहँपर नरपति का दरबार ११०
बड़ी खातिरी राजा कीन्ह्यो अपने पास लीन बैठाय ॥
माहिल बोले तहँ राजा ते मानो कही हमारी भाय १११
शूर छिपावो तुम महलन में भौरिन कटा देउ करवाय ॥
जाति बनाफर की नीची है हल्ला देशदेश अधिकाय ११२
पानी पीहै कोउ तुम्हरे ना मानो नरवर के महराज ॥
पगिया अरझी नहिं माहिलकै भावै तौन करो तुमकाज ११३
इतना कहिकै माहिल चलिभे तम्बुन फेरि पहुँचे आय ॥
तैसे कीन्ह्यो नरपति राजा जैसे माहिल गये बताय ११४
माड़ो छायो मालिन तुरतै राजै खम्भ दीन गड़वाय ॥
गऊ के गोबर आँगन लीप्यो बारिनि तुरततहांपरआय ११५
चौक बनावन प्रोहित लाग्यो आई नगर सुहागिल धाय ॥
ब्याह गीत सब गावन लागीं उत्सवदेखिपरे अधिकाय ११६
तब मकरन्दा को बुलवायो नरपति हालकह्यो समुझाय ॥
लैके नेगी तुम चलिजावो घरके ठाकुर लवो बुलाय ११७
इतना सुनिकै मकरँद चलिभा नाई बारी सङ्ग लिवाय ॥
जायकै पहुँच्यो त्यहि तम्बू में जहँपर बैठि बनाफरराय ११८
हाथ जोरिकै मकरँद बोल्यो जो कछु राजै दीन सिखाय ॥
दशै आदमी भौरिन आवैं यहजब सुन्यो बनाफरराय ११९
विस्मय कीन्ह्यो आल्हा मनमों मकरँद फेरि कहा समुझाय ॥