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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 274

उदयसिंहका विवाह । २७१ ३३
गोला लागै ज्यहि साँड़िया के तुरतै गिरै भूमि अललाय १५
जौने बैलके गोला लागै मानो मगर फुल्यावै खायँ ॥
जौने रथमाँ गोला लागै ताके टूक टूक द्वैजायँ १६
बड़ी दुर्दशा भै तोपन में धुवना रहा सरग में छाय ॥
दूनों दल आगे को बढ़िगे तोपन मारु बन्द द्वैजाय १७
उठीं बँदूकै बादलपूर की जो नब्बे कै याक बिकाय ॥
मघा के बूंदन गोली बरसें झरसैं सबै शूर त्यहि घाय १८
दूनों दल आगे को बढ़िगे रहिगा एक खेत मैदान ॥
भाला बरछी तलवारिन का लाग्यो होन घोर घमसान १६
अपन परावा कछु चीन्हैंना मारैं एक एक को जवान ॥
सूंढ़ि लपेटा हाथी भिड़िगे घोड़न भिरी रान में रान २०
कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि कहुँ कहुँ देखि परै तलवार ॥
दूनों दिशिके रजपूतन ने कीन्ह्यो तहां भड़ामड़मार २१
चलै कटारी बूँदी वाली ऊना चलै विलाइति क्यार ॥
तेगा धमकैं बर्दवान के कटि कटि गिरैं शूरसरदार २२
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥
रुधिर किसरिता तहँ बहिनिकरी जूझे क्षत्री अमित अपार २३
हाथी सोहैं त्यहि सरिता माँ छोटे दीपन्न के अनुमान ॥
परे बछेड़ा त्यहि नदिया माँ तिनको नदी कगाराजान २४
छुरी कटारी मछली ऐसीं ढालैं कछुवा परैं दिखाय ॥
वहैं सेवारा जस नदिया माँ तैसे बहे०गार तहँ जायँ २५
नचैं योगिनी खप्पर लीन्हे मज्जैं भूत प्रेत बैताल ॥
परीं लहासैं जो मनइन की तिनकाखावैं श्वानशृगाल २६
बड़ी सनेही नरदेही में कहुँ कहुँ चढ़े काक खगजायँ ॥