आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 254, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंउदयसिंहका विवाह । २५१ १३
बड़ा लड़ैया जगमाँ जाहिर ठाकुर बेंदुलका असवार १२७
इतना सुनिकै फुलवा बोली मालिनि साँच देउ बतलाय ॥
हाथ पैर पुरुषन के ऐसे करै करै परै दिखाय १२८
इतना सुनिकै मालिनि बोली साँचे बचन करो परमान ॥
भैंसि चराई बालापनमाँ माता पिता दरिद्रीजान १२६
परी व्यवस्था लरिकाई में ताको करी कहाँलगगान ॥
जैसी गुजरी हमरे ऊपर ऐसी परै न काहू आन १३०
फुलवा बोली फिरि हिरिया ते मालिनि जाउ घरै यहिबार ॥
काल्हि सबेरे यहि लैजायो साँची मानो कही हमार १३१
इतना सुनिकै हिरिया चलिमै अपने घरै पहुँचि आय ॥
फुलवा बाँदी को बुलवायो तासों चौपरलीन मँगाय १३२
खेलन लागी मालिनि सँगमाँ आधी राति गई नगच्याय ॥
लैकै पंखा बाँदी हाँकै ऊइन केर वस्त्र उड़िजाय १३३
कब्जा झलकै तलवारी का सो फुलवा के परा निगाह ॥
फुलवा बोली तब मालिनिते झलकै बगल तुम्हारे काह १३४
तुम नहिं बेटीहौ मालिनिकी औ छल किह्यो यहाँपर आय ॥
सुनि मकरन्दा तुमका पाई तुरतै खोदि लेइ गड़वाय १३५
अब पहिंचाना हम तुमको है बेटा देशराज के लाल ॥
जियत न जैहौ तुम महलनते औपारिग्योकालके गाल १३६
नाम तुम्हारो उदयसिंह है तुम्हीं बेंदुल के असवार ॥
इतना सुनिकै मालिनि बोली कीन्ह्योनीकी आजचिन्हार १३७
कहँ पै देख्यो तुम ऊदन को साँचे हाल देउ बतलाय ॥
इतना सुनिकै सब बाँदिनको फुलवा तुरतै दीन हटाय १३८
ओ फिरि बोली बबऊदन ते मानो कही बनाफरराय ॥