आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६ आल्हखण्ड । २३२
पहिली भाँवरि के परतै खन ताहर हनी तुरत तलवार ४४
दहिने ठाढ़ो मलखे ठाकुर सो लैलीन ढाल पर वार ॥
आधे आँगन भौंरी होवैं आधे चलनलागि तलवार ४५
ब्रह्मा ठाकुर की रक्षा में आल्हा ठाकुर भये तयार ॥
मलखे सुलखे जगनिक देवा आँगन करैं भड़ाभड़ मार ४६
तेगा चटकै बर्दवान का ऊना चलै विलाइति क्यार ॥
छुरी छूरा कोउ कोउ मारैं कोताखानी चलैं कटार ४७
फिरि फिरि मारैं औ ललकारैं नाहर दिल्ली के सरदार ॥
आँगन थिरकै उदन बाँकुड़ा लीन्हे हाथ नाँगि तलवार ४८
मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुंडन के लगे पहार ॥
बड़ी लड़ाई भै आँगन में औ वहिचली रक्तकी धार ४६
अपन परावा कछु सूझै ना आमाझोर चलै तलवार ॥
बड़े लड़ैया मलखे सुलखे नामी सिरसा के सरदार ५०
कोगति वरणै तहँ ताहर कै दूनों हाथ करै तलवार ॥
फिरि फिरि मारै औ ललकारै नाहर उदयसिंह सरदार ५१
कोगति वरणै तहँ देवाकै क्षत्री मैनपुरी चौहान ॥
मन्नागूजर जगना ठाकुर इनहुन खूबकीन मैदान ५२
मोहन ठाकुर बौरी वाला रणमाँ बड़ा लड़ैयाज्वान ॥
जोगा भोगा दोनों भाई मारिकै खूबकीन खरिहान ५३
विकट लड़ाई भै आँगन में साँगन खूब भई तहँ मार ॥
सातो लड़का पृथीराज के बाँध्यो सिरसाके सरदार ५४
सातो भँवरी ब्रह्मानँदकी आल्हा तुरत लीनकरवाय ॥
देखि तमाशा बघऊदन का पिरथी गये सनाकाखाय ५५
चौंड़ा बोला त्यहि समया में मानो कही पिथौरा राय ॥