आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
DevanagariHindipublished618 पृष्ठ
पृष्ठ 234, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 234
ब्रह्माका विवाह । २२७ ३१
बाजे डंका अहतंका के तम्बुन फेरि पहुंचे आय १८६
पिरथी पहुंचे राजमहल को सबियाँ झगड़ा गयो पटाय ॥
खेत छूटि गा दिननायक सों झंडागड़ा निशाको आय१६०
करों बन्दना पितु अपने की जिन बल भयोतरँगकोअन्त ॥
राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानीकन्त १६१
इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी,आई,ई ) मुंशी नवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागना-
रायणजीकीआज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्र
वंशोद्भवबुधकृपाशङ्करसूनुपण्डितललिताप्रसादकृतब्रह्माद्वारचार
वर्णनौनामाद्वितीयस्तरंगः ॥ २ ॥