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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 226

[Header] ब्रह्माका विवाह । २२१ २५

सगो भानजो ब्रह्मा हमरो तासौं कौनि हमारी रारि ११७
सुनिकै बातें ये माहिल की बोले उदयसिंह त्यहिबार ॥
अब तुम जावो फिरि दिल्लीको मामा उरई के सरदार ११८
शंका तुमपर नहिं काहूकी मामा मानो कही हमारि ॥
रक्षक ज्यहिकी जगदम्बा है त्यहिकोसकै कौनजगमारि ११९
सुनिकै बातें ये ऊदन की माहिल घोड़ी लीन मँगाय ॥
चढ़िकै घोड़ी माहिल ठाकुर फिरि दरबार पहुंचे जाय १२०
बड़ी खातिरी राजा कीन्ह्यो माहिल बैठिगयो शिरनाय ॥
माहिल बोले फिरि राजा ते मानो कही पिथौराराय १२१
खंभ गड़ावो दरवाजे पर तिनपर कलश देउ धरवाय ॥
जाँरा भौंरा दोनों हाथी तिनके आगे देउ छुड़ाय १२२
प्यायकै दारू तिन हाथिन को तुरतै मस्त देउ करवाय ॥
द्वारे आवैं जब परिमालिक तबयह बोल्योवचनसुनाय १२३
हाथी पछारो म्वरे द्वार में तुरतै भाँवरि देयँ डराय ॥
कुल की हमरे यह रीती है मानो कही चँदेलेराय १२४
अवती बचिहैं नहिं द्वारे पर मानो कही पिथौराराय ॥
इतना कहिकै माहिल चलिभे तम्बुन फेरि पहुंचे आय १२५
भई तयारी ह्वाँ दिल्ली में द्वारे खम्भ दीन गड़वाय ॥
जो कुछ माहिल बतलावाथा सो सब सामा दीन कराय १२६
गाड़ो छावा गा जल्दी सों जल्दी चौक भई तय्यार ॥
अई सुहागिल बहु दिल्ली की गावनलगीं मंगलाचार १२७
देखिकै सूरति ह्वाँ माहिल की मलखे कहे वचन यहिबार ॥
खवरि बनावो सब दिल्ली की मामा उरई के सरदार १२८
सुनिकै बातें ये मलखे की माहिल बोले वचन बनाय ॥