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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 224

[Header] ब्रह्माका बिवाह । २१६ २३

जहर घुरावो तुम शरबत में औ लशकरमें देउ पठाय ६३
बिना बयारी जूना टूटे औ बिन औषधि बहै बलाय ॥
यहै तयारी अब करिदारो तौ सबकाम सिद्ध है जाय ६४
साम दाम औ दण्ड भेद सों क्षत्री करें आपनो काम ॥
छल बल क्षत्री का धर्म है तुमको कौन करै बदनाम ६५
बातें सुनिकै ये माहिल की भा मन बड़ा खुशी नरनाह ॥
स्याबासि स्याबासि उरई वाले हमका नीकि दीन सलाह ६६
बिदा मांगिकै पृथीराज सों तम्बुन फेरि पहुंचा आय ॥
हाल बतायो परिमालिक को चेउँ न करी पिथौराराय ६७
जैसे पियासा पानी पावै सूखे धान परै जस नीर ॥
बातें सुनिकै ये माहिल की तैसे आय गयो मनधीर ६८
घड़ा मँगायो ह्वाँ पिरथी ने तामें जहर दीन डरवाय ॥
चारो नेगिन को बुलवायो सूरज पूत लीन बुलवाय ६६
कह्यो हकीकति सब सूरज सों पिरथी बार बार समुझाय ॥
तुरत कहारन को बुलवायो सूरज घड़ा लीन उठवाय १००
माथनायकै फिरि पिरथी को मनमें श्रीगणेश पद ध्याय ॥
सूरज चलिभा फिरि दिल्ली सों लश्कर तुरत पहुंचा आय १०१
जहँना तम्बू परिमालिक का बहिँगी तहाँ दीन धरवाय ॥
माथ नायकै परिमालिक को आपो बैठिगयो तहँ जाय १०२
मलखे बैठे हैं दहिने पर बायें बैठ उदयसिंहराय ॥
बैठ बराबर आल्हा ठाकुर शोभाकही बूत ना जाय १०३
सूरज बोले तहँ राजा सों शरबंत आप देउ बँटवाय ॥
करो तयारी फिरि द्वारे की साइति आयगईनगच्याय १०४
देवा बोला महराजा सों मानो कही चँदेलो राय ॥