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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 220

ब्रह्माका बिवाह । २१५ १६
बातें सुनिकै मलखाने की रूपना हाथजोरि शिर नाय ४७
उत्तर दीन्ह्यो मलखाने को मानो कही बनाफरराय ॥
नैनागढ़ भुन्नागढ़ नाहीं ह्याँपर बसै पिथौराराय ४८
लौटब मुशकिल है दिल्ली ते पिरथी मूड़ लेइ कटवाय ॥
औरो बारी हैं मोहेबे के तिनका आप देयँ पठवाय ४६
बातें सुनिकै ये रुपना की बोले उदयसिंह सरदार ॥
तेहा राखो रजपूती का बाँधो सदा ढाल तलवार ५०
जौन गोसइयाँ पैदा कीन्ह्यो सोई सदा बचावनहार ॥
बातें सुनिकै उदयसिंह की रूपन बोला बचन उदार ५१
घोड़ा पावैं हरनागर को औ मलखे कि ढाल तलवार ॥
ऐपनवारी हम लै जावैं लावैं नहीं नेकहू बार ५२
सुनिकै बातें ये रूपन की मलखे दीन ढाल तलवार ॥
ऐपनवारी रूपन लैकै हरनागर पर भयो सवार ५३
माथनाय कै सब क्षत्रिन को तुरतै कूच दीन करवाय ॥
पिरथी केरे फिर फाटकपर रूपन तुरत पहूंचा जाय ५४
तब ललकारा दरबानी ने बारी बड़ो के असवार ॥
कहाँते आयो औ कहँ जैहो ताहर समरथ रावरे क्यार ५५
सुनिकै बातें द्वारपाल्जादे रूपन पास बचन ततकाल ॥
आई बरातें हैं मोहेंबे के फाटकपार निकसजापरिमाल ५६
ब्याहन आये हैं ब्रह्माको रूपनवारी नाम हमार ॥
ऐपनवारी हम लाये हैं चाहिये नेग म्हार अब द्वार ५७
सुनिकै बातें ये रूपन की बोला द्वारपाल त्यहिबार ॥
नेगु तुम्हारो का द्वारे का बोलो घोड़े के असवार ५८
सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन कहा बचन ललकार ॥