आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका विवाह । २०५
जस मनभावै मलखाने के तैसी करो बनाफरराय ॥
बड़ी खुशीभै मलखाने के फूले अंग न सके समाय ८२
बड़ी प्रशंसाकी मल्हना की मलखे बार बार शिरनाय ॥
शाखा चलिहै महरानी तब ईजति हमरी लियो बचाय ८३
वारु न बांका इनका जैहै ओ महरानी बात बनाय ॥
जहाँ पसीना इनका गिरिहै तहँ मैं देहौं खून बहाय ८४
करो तयारी अब जल्दी सों ताहर टीका देय चढ़ाय ॥
बातें सुनिकै मलखानेकी मल्हना हुकुम दीन फर्माय ८५
बाँदी लीपन चौका लागी छींक्यो एक पुरुषने आय ॥
मल्हना बोली तब मलखे ते अशकुन बहुत परै दिखराय ८६
टीका फेरो तुम दिल्ली का मानो कही बनाफरराय ॥
बातें सुनिकै ये मल्हना की बोला तुरत लहुरवाभाय ८७
टीका फिरिहै जो दिल्ली का होई देश हँसौंवा माय ॥
कीन तयारी जब माड़ो की तबहूं छींक भई थी आय ८८
तबहूं रोंक्यो महरानी तुम माड़ो फते कीन हम जाय ॥
शकुन हमारो फिरि वैसे भा शंका कौन गई मन आय ८६
सुनिकै बातें उदयसिंह की मल्हना ठीक लीन ठहराय ॥
ऊदन मलखे द्वउ मनिहैं ना अब अनहोनी परै दिखाय ६०
बड़ा लड़ैया दिल्ली वाला है सब राजन में शिरताज ॥
तुम्ही गोसइयाँ दीनबन्धुहौ स्वामी रामचन्द्र महराज ६१
परो साँकरो अब हमपर है राखन हार तुम्ही रघुराज ॥
हम सुनिराखा है विप्रन सों राख्यो सदा भक्तकी लाज ६२
गौतम नारी को तुम तारा केवट लीन्ह्यो हृदय लगाय ॥
मांस अहारी गृद्धै तारयो भीलिनिदर्श दिखायो जाय ६३