आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका बिवाह । २०३ ७
कैसो दिल्ली में गिल्ली सम पिल्ली पूत पिथौरा राय ॥
लिल्ली घोड़िन के चढ़वैया लड़िहैं कौन तहाँपर भाय ६०
चौंड़ा बोला तहँ मलखे ते चलिये जहाँ चंदेलोराय ॥
सुनिकै बातें ये चौंड़ा की तीनों अटे महल में जाय ६१
देखिकै सूरति मलखाने कै बोला मोहबे का सरदार ॥
हाल बतावो सब सिरसा को ओ बिरमा के राजकुमार ६२
हाथ जोरिकै मलखे बोले दादा मोहबे के महराज ॥
मनोकामना सब पूरण हैं तुम्हरीकृपा सुफल सबकाज ६३
टीका लाये ये दिल्ली सों मैं ब्रह्माका करों बिवाह ॥
यही कामना यक बाकी है साँची मानु कही नरनाह ६४
पाती दीन्ह्यो मलखाने ने बांचन लाग रजापरिमाल ॥
डसै भुवंगम लहरैं आवैं कहरन लाग तुरत नरपाल ६५
हाथ जोरिकै ऊदन बोले दादा मोहबे के महराज ॥
टेक न टारैं मलखे दादा तासों करे बनी यहु काज ६६
सुनिकै बातें ये ऊदन की बोले तुरत रजापरिमाल ॥
हाल बतावो सब मल्हनाको वाको बड़ो पियारो बाल ६७
मोहिं बुढ़ापा की लाठी है ब्रह्मा बड़ा पियारा मान ॥
नामी राजा दिल्लीवाला ठाकुर समरधनी चौहान ६८
टेक कठिनहै मलखाने कै पूरण यहौ हृदय विश्वाश ॥
जियब न देखें हम काहू कर सबकर होय वहाँपर नाश ६६
पढ़िकै चिट्ठी पृथीराज की हमरे गई करेजे हूक ॥
जानि बूझिकै जस मलखे की ऐसी करै कौन नर चूक ७०
सवैया ॥
सुनिकै नृपबैन तबै बलऐन बोले मलखे ललिते अनखाई ।