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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 618 में से

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पृष्ठ 207

६ आल्हखण्ड । २०२
सुनिकै बातें ई मलखे की ताहर हाल गयो सबगाय ॥
मलखे बोले फिरि ताहर सों लड़का तुम्हें देयँ बतलाय ४८
संग हमारे कछु दूरी तुम औरो चलो बीरचौहान ॥
इतना सुनिकै दूनों चलिभे मोहोबे गये तीनहू ज्वान ४६
ताहर बोले तहँ मलखे ते यहुहै कौन शहर मलखान ॥
मलखे बोले तहँ ताहर सों यहहै नगर मोहोबा ज्वान ५०
यहँको राजा परिमालिक है ब्रह्मा लड़का तासु कुँवार ॥
तोरी बहिनी सों त्यहि ब्याहौं साँची बात मानु सरदार ५१
सुनिकै बातें ये मलखे की ताहर बहुत गयो शर्माय ॥
ऐसी बातें का तुम बोले ब्याह न करें बनाफरराय ५२
नहीं आज्ञा दिल्लीपति कै टीका नगर गोहोबे जाय ॥
सरबरि हमरी का नाहीं हैं ठाकुर काह गयो बौराय ५३
सुनिकै बातें ये ताहर की बोला बचन बीर मलखान ॥
धाँसि सिरोही मुँहमें देवों जोफिरि ऐस कहै चौहान ५४
इतनी सुनिकै ताहर ठाकुर पाती तुरत दीन पकराय ॥
मूड़ कटाई सो ब्याहे माँ नाहर जौन पिथौराराय ५५
ताका बाना जग मर्दाना मारै शब्द ताकिकै बान ॥
परै निशाना पूरशब्द पर ता सँग कौन लड़ैया ज्वान ५६
सुनिकै बातें ये ताहर की बोला तुरत बनाफरराय ॥
लड़ै मरैका कछु डर नाहीं यहही धर्म सनातन भाय ५७
रीछ बाँदरन सँग में लैके लङ्का विजय कीन भगवान ॥
ग्वालन बालन सँगमा लैके कंसै हना कृष्ण बलवान ५८
काह हकीकति है दिल्ली कै चलिकै बिल्ली देउँ बनाय ॥
पौर खशभिल्ली दिल्ली जाई किल्ली तुरतै देउँ नवाय ५९