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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 174

मलखानका विवाह । १६९ १३
सुनिकै बातें ये रूपन की पहुँचा द्वारपाल दरबार ॥
झारि बिसेने सब बैठे हैं एकते एक शूर सरदार १२८
हाथ जोरि औ बिनती करिकै बोला द्वारपाल शिरनाय ॥
ऐपनावारी बारी लायो भारी नेग चहै ह्याँ आय १२९
चार पहरभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्तकी धार ॥
नेग आपनो बारी बोलै लीन्हे हाथ ढाल तलवार १३०
सुनिकै बातें द्वारपाल की तब गजराजा उठा रिसाय ॥
बाँधिकै मुशकें त्यहि बारी की सूरज मोहिं दिखावै आय १३१
इतना सुनिकै मानसिंह तहँ द्वारे तुरत पहुँचा आय ॥
सेल चलायो त्यहि रूपनापर रूपनालीन्ह्यो वारबचाय १३२
मार्यो लटुवा फिरि भालाको शिरते चली खूनकी धार ॥
ऐँड़ा मसक्यो फिरि घोड़ी के फाटकनिकरिगयोवहिपार१३३
बहुतक दौरे फिरि पाछे सों धरु धरु मारु करें लतकार ॥
घोड़ी कबुतरी मलखेवाली नामी मोहबेका सरदार १३४
त्यहिके बलसों रूपन बारी बहुतन मारि मिलायो खार ॥
जायकै पहुँचा फिरि तम्बुन में भारी लाग जहाँ दरबार १३५.
दीख्यो ऊदन तहँ रूपन का मानों फगुई का त्यवहार ॥
कैसी गुजरी रहै द्वारेपर बोले उदयसिंह सरदार १३६
सुनिकै बातें ये ऊदन की रूपन यथातथ्य गा गाय ॥
खेत छूटिगा दिननायक सों झंडागड़ा निशाको आय१३७
तारागण सब चमकन लागे संतन धुनी दीन परचाय ॥
परे आलसी खटिया.तकितकि घों घों कण्ठ रहा घर्राय १३८
करौं बन्दना गणनायक की दोनों चरणकमल शिरनाय ॥
शीश नवावों पितु अपने को मनमें सदा रामपदध्याय १३६