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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 170

मलखानका विवाह। १६५ ६
दिल्ली कनउज औ नैनागढ़ उरई न्यवत दीन पठवाय ॥
सिरउज पनउज औ बौरी में न्यवता भेजा चँदेलोराय ८२
पायके चिट्ठी परिमालिककै इनको मानि बड़ो ब्यवहार ॥
नगर मोहोबे के जानेको राजा होन लागि तय्यार ८३
बाजे डंका अहर्तका के राजन कूचदीन करवाय ॥
तेरस केरो शुभ मुहूर्त पढ़ मोहबे गये सबै नृप आय ८४
तम्बू गड़िगे महराजन के खातिर कीन उदयसिंहराय ॥
पढ़े पढ़ाये सब क्षत्री रहें अपने धर्म कर्म समुदाय ८५
उचित औ अनुचितके ज्ञातारहें जानैं राजनीति सब भाय ॥
देश आरिया यह बाजत है आर्य कहै बसिंदा जायँ ८६
आर्य ऊदन त्यहि समया में सबको खुशी कीन अधिकाय ॥
तुरत नगड़ची को बुलवायो तासों कह्यो हाल समुझाय ८७
बाजे डंका अब मोहवे माँ सबियाँ फौज होय तय्यार ॥
सुनिकै बातें ये ऊदन की डंका भजनलाग त्यहिबार ८८
मलखे आये फिरि महलन में होवन लाग तेल त्योहार ॥
एक कुमारी तेल चढ़ावै गावैं सबै मंगलाचार ८६
माय मन्तरा भे दूसरे दिन नहखुर समयगयो फिरिआय ॥
लैके महाउर नाइनि आई नहखुर करन लागि हर्षाय ६०
जो कछु माँग्यो ज्यहि नेगी ने मल्हना दीन ताहिसमुझाय ॥
मनके भाय जब सब पाये नेगिन खुशी कहीनाजाय ६१
कुँवाँ बियाहन के समया में मलखे चढ़ पालकी धाय ॥
बिटिया मल्हना की चन्द्रावाले राई नोन उनारति जाय ६२
जायकै पहुंचे फिरि कुँवनापर बिरमा पैर दीन लटकाय ॥
भाँवरि घूम्यो मलखाने ने लीन्ह्यो माता पैर उठाय ६३