आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआल्हाका विवाह । १४५ २६'
देखि तमाशा द्वारपाल तहँ ऊदन निकट पहुंचे आय ॥
साथ तुम्हारे द्वै घोड़ा हैं औ असवार एक तुम भाय ३१
रूप तुम्हारो बयपारी को आयो कौन देश ते भाय ॥
घोड़ा लायेते काबुलते बेचे सबै कन्नौजै जाय ३२'
एक इकेलो यह बाकी है राजै खबरि सुनावै जाय ॥
इतना सुनिकै द्वारपाल फिरि राजै दीन्ह्यो खबरि बताय ३३
खबरि पायकै अरिनन्दन फिरि द्वारे पौरि पहुंचे आय ॥
घोड़ पपीहा मोहबेवाला राजा देखिगये हरषाय ३४
राजा बोले बघऊदन ते याकी कीमति देवबताय ॥
ऊदन बोले अरिनन्दनते साँचे बचन देयँ बतलाय ३५
पहिले चढ़िकै यहि घोड़ेपर कोऊ ज्वान नचावै आय ॥
हाल देखिल्यो यहि घोड़ेका तब मैं कीमति देउँ बताय ३६'
सुनिकै बातें सौदागरकी राजै हुकुम दीन फर्माय ॥
बैठै क्षत्री जो कोउ जावै घोड़ा टापन देय हटाय ३७
होय मोहबिया कोउ मोहबेका घोड़ा देखि सीध है जाय ॥
टेढ़े घोड़ेके चढ़वैया मोहबे बसैं बनाफरराय ३८
सुनिकै बातें सौदागरकी तुरतै आल्है लीन बुलाय ॥
हुकुम लगायो अरिनन्दनने घोड़ा बैठि नचावोभाय ३६'
हुकुम पायकै अरिनन्दनको घोड़ा चढ़े बनाफरराय ॥
घोड़ नचायो भल आल्हाने ऊदन बोल्यो बचन सुनाय ४०'
जल्दी चलिये अब लश्करको दादा काह रह्यो पछिताय ॥
नाम हमारो उदयसिंहहै ओ अरिनन्दन बात बनाय ४१
इतना कहिकै बघऊदनने आपन घोड़ दीन दौड़ाय ॥
आल्हौ चलिभे फिरिजल्दीसों लश्कर दोऊ पहुंचेभाय ४२'
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