अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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साखियों ने अभी तेरे सामने क्या कहा है ? फूलचन्द ने उत्तर
दिया-“हुजूर मार की डर से भूत भागता है, आखिर वे तो
मनुष्य ही हैं। केवल मार से बचने के लिये ही सबों ने आपके
सामने झूठ बोलना स्वीकार किया है।" इस पर बीरबल ने
कहा-“तब ये मोम का पिंड लाल के आकार का क्यों नहीं
बनालाये, यदि लाल को देखे होते तो जरूर बना लाते।” बेशक
तू झूठा है और सजा के काबिल है।" बीरबल ने सिपाहियों
को उसे कोड़े लगाने की आज्ञा दी। सिपाहियों ने दोनों
तरफ से एक एक कोड़े जमाये। रूपचन्द भी ठिकाने आ गया
और अपना कसूर गर्दन कर अर्ज किया-“हुजूर वें लाल
मेरे ही पास हैं मैं उन्हें अभी ला देता हूँ।” लालों को मँगा कर
बीरबल ने एक लाल रूपचन्द को दिया और दूसरा फूलचन्द
के हिस्से का राज-कोष में जमा करा दिया। फूलचन्द
और उसके साखियों को झूठा बोलने के कारण उचित
दण्ड दिया गया।
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सब सयानों का एकमत
एक दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा-“क्यों बीरबल
संसार के मनुष्यों की बुद्धि एक समान होती है वा
उसमें कुछ अन्तर भी होता है।” बीरबल ने जवाब दिया-
“पृथ्वीनाथ ! क्या आपने इस कहावत को नहीं सुना है-“सब
सयानों का एक मत।” यानी और सब बातों में तो लोगों
की बुद्धि में विभेद पाया जाता है, परन्तु स्वार्थ सिद्धि में