सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 496, कुल 592 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 496

४८२ [ आठवीँ पञ्चिका
इसी इन्द्र के महाभिषेक से भृगु के लड़के च्यवन ने मनु के
पुत्र शर्यात का अभिषेक किया, इसलिये मनु के पुत्र शर्यात ने

  • ने पृथ्वी भर पर फिर कर उसको जीत लिया और अश्वमेध
    यज्ञ किया और देवों के यज्ञ में गृहपति बना । इसी इन्द्र के
    महाभिषेक से वाजरत्न के पुत्र सोमशुष्मा ने सत्राजित के पुत्र
    शतानीक का राज्याभिषेक किया । शतानीक ने पृथ्वी को घूम २
    कर जीत लिया और अश्वमेध यज्ञ किया । इसी इन्द्र के महा-
    भिषेक से पर्वत और नारद ने अम्बाष्ठ्य का अभिषेक किया ।
    इसलिये अम्बाष्ठ्य ने फिर २ कर पृथ्वी को जीत लिया और
    स्वयं अश्वमेध यज्ञ किया ।
    इसी इन्द्र के महाभिषेक से पर्वत और नारद ने उग्रसेन
    के लड़के युधांश्रौष्टि का अभिषेक किया और इसने पृथ्वी भर
    को घूम फिर कर जीत लिया और अश्वमेध यज्ञ किया ।
    इसी इन्द्र के महाभिषेक से कश्यप ने, भुवन के पुत्र विश्व-
    कर्मा ने घूम फिर कर समस्त पृथ्वी को समुद्र के तट तक जीत
    लिया और अश्वमेध यज्ञ किया । कहते हैं कि विश्वकर्मा की
    प्रशंसा में पृथ्वी ने यह गीत गाया :—
    न मा मर्त्यः कश्चन दातुमर्हति ,
    विश्वकर्मन् भौवन मां दिदासित्थ ।
    निमंक्ष्येऽहं सलिलस्य मध्ये ,
    मोघस्त एष कश्यपायास संगरः ।
    “हे विश्वकर्मा, कोई मेरा दान नहीं कर सकता । तू ने
    मुझे दान कर दिया । मैं समुद्र में गिर जाऊँगी । तेरा कश्यप को
    देने की प्रतिज्ञा करना व्यर्थ है ।”
    इन्द्र के इसी महाभिषेक से वशिष्ठ ने पिजवन के पुत्र