ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 387, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंतीसरा अध्याय ] ३७३
होता के याज्य में :—
ऋतुभिर्वाजवद्भिः समुक्षितम् ।
ऋभुओं का स्पष्ट लेख है। लेकिन दूसरों में स्पष्ट लेख
नहीं।
मैत्रावरुण का याज्य यह है :—
इन्द्रावरुणा सुतपाविमं सुतम् । ( ऋ० ६।६८।१० )
इसमें एक पद है :—युवोरथो अध्वरं देववीतये । इसमें
बहुवचन है । यह ऋभुओं का रूप है ।
ब्राह्मणाच्छंसी का मंत्र यह है :—
इन्द्रश्च सोमं पिबतं बृहस्पते...( ऋ० ४।५०।१० )
इसमें 'विशंत्विंदवः स्वाभुवः' पद आया है । यह बहुवचन
है । बहुवचन ऋभुओं का रूप है ।
पोता का याज्य मंत्र है :—
आ वो वहंतु सप्तयो रघुष्यदो...( ऋ० १।८५।६ )
इसमें "रघु पत्वानः प्रजिगात बाहुभिः' आया है । यह बहु-
वचन है । बहुवचन ऋभुओं का रूप है ।
नेष्टा का याज्य मंत्र यह है :—
अमेव नः सुहवा आ हि गंतन...( ऋ० २।३६।३ )
इसमें 'गंतन' बहुवचन है । यह बहुवचन ऋभुओं का रूप
है ।
अच्छावाक् का याज्य यह है :—
इन्द्राविष्णू पिबतं मध्वोऽस्य...( ऋ० ६।६९।७ )
इसमें "आवामंधांसि मदिराय्यग्मन्"...बहुवचन है । बहु-
वचन ऋभुओं का रूप है ।
अग्नीध्र का याज्य यह है :—
इमं स्तोममहं ते जातवेदसे ( ऋ० १।९४।१ )