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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 592 में से

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पृष्ठ 354

३४० [ पाँचवीं पञ्चिका
२५-चतुर्होत्री कहने वाला पुकारता है, "हे अध्वर्यु"।
यही उचित "आहाव" है। ( 'शौंसावोम्' इस अवसर के लिये
उचित आहाव नहीं है)।
अध्वर्यु कहता है, "ओ३म् होत:" या "तथा होत:"।
अब होता चतुर्होत्री को दुहराता है। दस पदों में से हर एक
पर ठहरता हुआ :-
( १ ) तेषां चित्तिः स्रुगासी३त् । (उनकी बुद्धि स्रुक् थी)
( २ ) चित्तमाज्यमासी३त् । (चित्त आज्य था)
( ३ ) वाग्वेदिरासी३त् । (वाणी वेदि थी)
( ४ ) आधीतं बर्हिरासी ३त् । (पढ़ा हुआ आसन था)
( ५ ) केतोऽअग्निरासी३त् । (समझ अग्नि थी)
( ६ ) विज्ञातमग्नीध्ररासी ३त् । (विज्ञान अग्नीध्र था)
( ७ ) प्राणो हविरासी ३त् । (प्राण हवि था)
( ८ ) सामाध्वर्यु रासी ३त् (साम अध्वर्यु था)
( ९ ) वाचस्पतिर्होतासी३त् । (वाचस्पति होता था)
(१०) मन उपवक्तासी ३त् । (मन उपवक्ता या मैत्रावरुण था)
(११) ते वा एतं ग्रहमगृह्णत । (उन्होंने ग्रह को लिया)
(१२) वाचस्पते विधे नामन् (हे वाचस्पति, हे विधि, हे नाम)
(१३) विधेम ते नाम । (हम तेरा नाम लें)
(१४) विधेस्त्वमस्माकं नाम्ना द्यां गच्छ । ( तू हमारे नाम
से द्यौ लोक को जा )
(१५) यां देवाः प्रजापतिगृहपतय ऋद्धिमराध्नुवंस्तामृद्धि
रात्स्यामः। (देव और प्रजापति गृहपतियों ने जो
ऋद्धि प्राप्त की उसी ऋद्धि को हम भी प्राप्त करें)
अब होता "प्रजापतेस्तनूः" और 'ब्रह्मोद्य" मन्त्रों को
पढ़ता है। (प्रजापतेस्तनू मन्त्र १२ हैं। यह दो दो कर के पढ़े
जाते हैं।)