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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 319, कुल 592 में से

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पृष्ठ 319

दूसरा अध्याय ] ३०५
था । जो इस रहस्य को समझता है वह भी सात स्वर्गों को चढ़
जाता है ।
यहां शंका होती है कि जब पांच पदों की ऋचायें पांचवें
दिन बोली जाती हैं और छः पदों की छठे दिन तो सात पद
वाले छन्द छठे दिन क्यों पढ़े जायं । ( इसका उत्तर यह है )
कि छः पदों से छठे दिन को प्राप्त हो जाते हैं। लेकिन सातवें
दिन को काट कर सातवें पद से ( स्वर्ग में ) स्थिर हो जाते
हैं। इस प्रकार वह संतति या सिलसिले के लिए वाणी को
प्राप्त कर लेते हैं। जो इस रहस्य को समझ कर कृत्य करते हैं
उनका त्र्यह छिन्न-भिन्न नहीं होता । (५)
११—देवों और असुरों ने इन लोकों में झगड़ा किया ।
देवों ने छठे दिन के कृत्य से असुरों को इन लोकों से निकाल
दिया। असुरों को जो कुछ हस्तगत हो सका उसको उन्होंने
ल लिया और समुद्र में फेंक दिया। देव पीछे दौड़े और इस
छन्द के द्वारा जो कुछ उन्होंने लिया था उसे छीन लाये । इस
सातवें पद ने कटियां ( अंकुश ) का काम दिया जिससे समुद्र
से चीज़ें निकाल ली गईं ।
इसलिये जो इस रहस्य को समझता है वह अपने शत्रु से
धन छीन लेता है और सब लोकों से उनको निकाल देता है । (६)
१२—छठे दिन का वाहक देवता द्यौ है। तैंतीस स्तोम हैं।
रैवत साम है। अतिच्छन्द छन्द है। जो यह जानता है कि
कौन देवता है, कौन स्तोम है, कौन साम है और कौन छन्द है,
उसका यज्ञ सफल हो जाता है ।
छठे दिन का वही रूप है जो तीसरे दिन का अर्थात्
समानोदर्क होना, 'अश्व' और 'अन्त' शब्द आना, पुनरावृत्ति,
निवृत्ति ( rhyme ), रति या रमण करना, पर्याय, तीन,
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