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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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पृष्ठ 31

पहला अध्याय
अग्निष्टोम का आरंभ
दीक्षणीय-इष्टि
१—देवों में अग्नि का सबसे आदि का और विष्णु का
सबसे अन्त का पद है । इनके बीच में और सब देव हैं । दीक्ष-
णीय इष्टि❀ में ग्यारह कपालों (प्यालों) वाला अग्नि-विष्णु का
पुरोडाश अर्पण करना चाहिये† । बिना किसी को छोड़े । इस
दृष्टि से सभी देवताओं के लिए अर्पण करते हैं । क्योंकि अग्नि ही
सब देवता है । विष्णु ही सब देवता है । यह दोनों शरीर धारी
(तन्वौ अर्थात् शरीर धारी या स्थूल रूप अर्थात् वास्तविक सत्ता
वाले) अग्नि और विष्णु यज्ञ के किनारे हैं । यह जो अग्नि और
❀सोमयाग में गोष्टोम, आयुष्टोम, आदि कई विभाग हैं । उनमें
सबसे पहला ज्योतिष्टोम है । इस ज्योतिष्टोम की चार संस्थायें हैं ।
( १ ) अग्निष्टोम ( २ ) उक्थ्य ( ३ ) षोडशी ( ४ ) अतिरात्र ।
ऐतरेय ब्राह्मण का आरंभ अग्निष्टोम से होता है ।
†यहाँ वर्तमान विधि-अर्थ में है, लिङर्थे लेट् (पाणिनि ३।४।७ )
( १७ )
२