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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 282, कुल 592 में से

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२६८ [ चौथी पञ्चिका
मरुत्वती शस्त्र का प्रतिपद् या पहला भाग यह है :
आ त्वा रथं यथोतये सुम्नाय वर्तयामसि । तुवि कूर्मिमृतीष हर्मीन्द्र
शविष्ठ सत्पते ॥
तुवि शुष्म तुविक्क्रतो शचीवो विश्वया मते । आ पप्राथ महित्वना ॥
यस्य ते महिना महः परि ज्मायन्तम्रीयतुः । हस्ता वज्रं हिरण्ययम् ॥
( ऋ० ८।६८।१-३ )
इसका अनुचर या पिछला भाग यह है :-
इदं वसो सुतमन्धः पिवा सुपूर्णमुदरम् । अनाभयिन् ररिमा ते ॥
नृभिर्धूतः सुतो अश्नैरव्यो वारैः परिपूतः । अश्वो न निक्तो नदीषु ॥
तं ते यवं यथा गोभिः स्वादुमक्रम श्रीणन्तः । इन्द्र त्वा-
स्मिन्त्सधमादे ॥ ( ऋ० ८।२।१-३ )
इनमें 'रथ' और 'पिव' आये हैं। यह पहले दिन का रूप है।
इन्द्र-निहव प्रगाथ यह है :-
इन्द्र नेदीय एदिहि मितमेधाभिरूतिभिः । आ शन्तम शन्तमाभिर-
भिष्टिभिरा स्वापे स्वापिभिः ॥
आजितुरं सत्पतिं विश्वचर्षणिं कृधि प्रजास्वाभगम् । प्र सू तिरा
शचीभिर्ये त उक्थिनः ऋतुं पुनत आनुषक् ॥ ( ऋ० ८।५३।५, ६ )
इसके पहले पद में देवता का वर्णन है। यह पहले दिन का
रूप है।
ब्राह्मणास्पत्य प्रगाथ यह है :-
प्रैतु ब्रह्मणस्पतिः प्रदेव्येतु सूनृता । अच्छा वीरं नर्यं पङ्क्तिराधसं
देवा यज्ञं नयन्तु नः ॥
यो वाघते ददाति सूनरं वसु स धत्ते अक्षिति श्रवः ! तस्मा इडां
सुवीरामा यजामहे सुप्रतूर्तिमनेहसम् ॥ ( ऋ० १-४०।३-४ )
इसमें 'प्र' आया है। यह पहले दिन का रूप है।
यह धाय्य यह है:-
अग्निर्नैता, त्वं सोमऋतुभिः, पिन्वंत्यपः ॥ (ऐतरेय ब्राह्मण ३।१८)