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सर्वकोश
आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning

महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 32 में से

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पृष्ठ 6

Āditya-Hṛdaya-Stotram*
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥ १॥
दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा॥ २॥
'उधर श्रीरामचन्द्रजी युद्धसे थककर चिन्ता करते हुए रणभूमिमें खड़े
थे। इतनेमें रावण भी युद्धके लिये उनके सामने उपस्थित हो गया। यह
देख भगवान् अगस्त्य मुनि, जो देवताओंके साथ युद्ध देखनेके लिये आये
थे, श्रीरामके पास जाकर बोले'॥ १-२॥
* Verses in the praise of Sun-god.