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सर्वकोश
आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning

महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

आदित्यहृदयस्तोत्रम् १५
घनवृष्टि (घनी वृष्टिके कारण), अपां मित्र (जलको उत्पन्न करनेवाले),
विन्ध्यवीथीप्लवंगम (आकाशमें तीव्र वेगसे चलनेवाले), आतपी (घाम
उत्पन्न करनेवाले), मण्डली (किरणसमूहको धारण करनेवाले), मृत्यु
(मौतके कारण), पिंगल (भूरे रंगवाले), सर्वतापन (सबको ताप
देनेवाले), कवि (त्रिकालदर्शी), विश्व (सर्वस्वरूप), महातेजस्वी, रक्त
(लाल रंगवाले), सर्वभवोद्भव (सबकी उत्पत्तिके कारण), नक्षत्र, ग्रह
और तारोंके स्वामी, विश्वभावन (जगत्की रक्षा करनेवाले), तेजस्वियोंमें
भी अति तेजस्वी तथा द्वादशात्मा (बारह स्वरूपोंमें अभिव्यक्त) हैं।
[इन सभी नामोंसे प्रसिद्ध सूर्यदेव!] आपको नमस्कार है'॥ ६—१५॥