आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)
Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning
महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
DevanagariHindipublished32 पृष्ठ
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आदित्यहृदयस्तोत्रम् १४
(अन्धकारका नाश करनेवाले), शम्भु (कल्याणके उद्गम स्थान), त्वष्टा
(भक्तोंका दुःख दूर करने अथवा जगत्का संहार करनेवाले),
मार्तण्डक (ब्रह्माण्डको जीवन प्रदान करनेवाले), अंशुमान् (किरण
धारण करनेवाले), हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा), शिशिर (स्वभावसे ही सुख
देनेवाले), तपन (गर्मी पैदा करनेवाले), अहस्कर (दिनकर), रवि
(सबकी स्तुतिके पात्र), अग्निगर्भ (अग्निको गर्भमें धारण करनेवाले),
अदितिपुत्र, शंख (आनन्दस्वरूप एवं व्यापक), शिशिरनाशन
(शीतका नाश करनेवाले), व्योमनाथ (आकाशके स्वामी), तमोभेदी
(अन्धकारको नष्ट करनेवाले), ऋग्, यजुः और सामवेदके पारगामी,