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सर्वकोश
१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ

पृष्ठ 442, कुल 572 में से

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पृष्ठ 442

४३४ ] [रुद्रहृदयोपनिषत्
कार्यं रूप विष्णु, क्रिया रूप ब्रह्मा और कारण रूप रुद्र हैं। इस प्रकार
भगवान् रुद्र ने ही प्रयोजन के अनुसार अपने तीन रूप धारण किए हैं।
संसार विष्णुरूप, ज्ञान ब्रह्मारूप और धर्मं रुद्ररूप है। जो ज्ञानी
पुरुष रुद्र के नाम का जप करता है, वह इससे सभी देवताओं के नाम-
जप का फल पाकर सब पापों से छूट जाता है ॥११-१६॥
रुद्रो नर उमा नारी तस्मै तस्यै नमो नमः ॥१७
रुद्रो ब्रह्मा उपा वाणी तस्मै नमो नमः।
रुद्रो विष्णुरुमा लक्ष्मीस्तस्मै तस्यै नमो नमः ॥१८
रुद्रः सूर्य उमा छाया तस्मै तस्यै नमो नमः ।
रुद्रः सोम उमा तारा तस्मै तस्यै नमो नमः ॥१९
रुद्रो दिवा उमा रात्रि तस्मै तस्यै नमो नमः ।
रुद्रो यज्ञ उमा वेदिस्तस्यै तस्मै नमो नमः ॥२०
रुद्रो वह्निरुमा स्वाहा तस्मै तस्यै नमो नमः ।
रुद्रो वेद उमा शास्त्रं तस्यै नमो नमः ॥२१
रुद्रो वृक्ष उमा वल्ली तस्मै तस्यै नमो नमः ।
रुद्रो गन्ध उमा पुष्पं तस्मै तस्यै नमो नमः ॥२२
रुद्रोऽथं अक्षरः सोमा तस्मै तस्यै नमो नमः ।
रुद्रो लिङ्गमुमा पीठं तस्मै तस्यै नमो नमः ॥२३
सर्वदेवात्मकं रुद्रं नमस्कुर्यात् पृथक्पृथक् ।
एभिर्मन्त्रपदैरेव नमस्यामीशपार्वती ॥२४
यत्र यत्र भवेत् सार्धमिमं मन्त्रमुदीरयेत् ।
ब्रह्महा जलमध्ये तु सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥२५
रुद्र रूप पुरुष और उमा रूप स्त्री, इस प्रकार के रूप द्वय में
भगवान् शङ्कर और भगवती उमा को नमस्कार है । रुद्र ब्रह्मा स्वरूप