१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ
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४३० ] [ नीलरुद्रोपनिषत्
संसार के कारण भव को नमस्कार, संहार करने वाले रुद्र को
नमस्कार, संसार के संहारक भगवान् शंकर को नमस्कार, नीलमुकुट
धारी और काले सींग वाले केदारेश्वर को नमस्कार । दक्ष के यहां मण्डप
को सुशोभित करने वाले कुमार रूप शिव को नमस्कार ।
जिन नीलशिखण्डधारी से अश्व, खच्चर, गर्दभ आदि-आदि की
उत्पत्ति हुई, उनको नमस्कार । सभा मण्डप को सुशोभित करने वाले
शिव रूप ईश्वर को बारम्बार नमस्कार ॥ ३ ॥
॥ नीलरुद्रोपनिषद् समाप्त ॥
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