१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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जाते हैं । जो मध्याह्न, ( दोपहर ) में पढ़ता है, उसके छः जन्मों के
पाप नष्ट हो जाते हैं । प्रतिदिन प्रातः सायं पढ़ने से अनेक जन्मों के
पाप नष्ट हो जाते हैं तथा छः हजार लाख गायत्री जप के फल को
प्राप्त करता है एवं ब्रह्महत्या, सुरापान ( शराब पीना ) सोना चुराना,
गुरु की पत्नी से सम्भोग करना, आदि २ पापों के करने पर भी पवित्र
हो जाता है तथा सभी तीर्थों के फल को प्राप्त करता है । नीचों से
बातचीत करने पर जो पाप लगता है अथवा पुण्यक्षय होता है, उससे
भी छूट जाता है एवं वह सैकड़ों हजारों पंक्तियों को ( अर्थात् बहुत
अधिक प्राणियों को ) पवित्र करने वाला हो जाता है तथा शिवजी की
समीपता को प्राप्त करता है ( अर्थात् सदा शिव के साथ विहरण करता
है ) और कभी फिर जन्ममृत्यु के चक्कर में नहीं फँसता ॥३६॥
॥ रुद्राक्षजाबालोपनिषद् समाप्त ॥