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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 330 of 421

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Page 330

उत्तरार्ध सत्ताईसवां अध्याय
तिस्रो देवीर्बर्हिरेद ᳪ सदन्त्विडा सरस्वती भारती. मही गृणाना.. (१९)
इड़ा देवी, सरस्वती देवी और भारती देवी महिमामयी हैं. वे गणमान्य हैं. वे
(यज्ञ) सदन में पधारने और कुश के आसन पर विराजने की कृपा करें. (१९)
तन्नस्तुरीपमद्भुतं पुरुक्षु त्वष्टा सुवीर्यम्. रायस्पोषं वि ष्यतु नाभिमस्मे.. (२०)
त्वष्टा देव! अद्भुत, सर्वद्रष्टा, श्रेष्ठ वीर्य वाले और गतिमान हैं. वे देव हमें
पोषक धन प्रदान करने की कृपा करें. (२०)
वनस्पतेव सृजा रराणस्तमना देवेषु. अग्निहर्व्य ᳪ शमिता सूदयति.. (२१)
हे वनस्पति! आप हमारे और देवताओं के लिए ओषधि उपलब्ध कराएं. अग्नि
सुखदायी हैं. वे हमारी आहुति को शोधित करने की कृपा करें. (२१)
अग्ने स्वाहा कृणुहि जातवेद ऽ इन्द्राय हव्यम्.
विश्वे देवा हविरिदं जुषन्ताम्.. (२२)
हे अग्नि! आप सर्वज्ञ हैं. आप इंद्र देव के लिए हमारी ओर से दी गई आहुति व
यज्ञ में सभी देवताओं तक हमारी हवि पहुंचाने की कृपा कीजिए. (२२)
पीवो अन्ना रयिवृधः सुमेधाः श्वेताः सिषक्ति नियुतामभिश्रीः.
ते वायवे समनसो वि तस्थुर्विश्वेनरः स्वपत्यानि चक्रुः.. (२३)
वायु अन्न व धन से बढ़ोत्तरी पाते हैं. वे श्रेष्ठ बुद्धि संपन्न, श्वेत व समान मन
वाले हैं. श्रेष्ठ मनुष्य अच्छी संतान पाने के लिए वायु की आराधना करते हैं. (२३)
राये नु यं जज्ञतू रोदसीमे राये देवी धिषणा धाति देवम्.
अध वायुं नियतः सश्चतः स्वा उत श्वेतं वसुधितिं निरेके.. (२४)
देवी देव को धन के लिए धारण करती है. स्वर्गलोक और पृथ्वी लोक हमारे यज्ञ
में हमारे लिए धन धारण करें. वायु धनधारी हैं. सभी उन का सेवन करते हैं. (२४)
आपो ह यद्बृहतीर्विश्वमायन् गर्भं दधाना जनयन्तीरग्निम्.
ततो देवाना ᳪ समवर्ततासुरेकः कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (२५)
जल अपार है. विश्व को अपने में समाए हुए है. अग्नि को गर्भ में धारण करता
है. उस से देवताओं की उत्पत्ति हुई. उन के अलावा हम अब किस देवता के लिए
हवि का विधान करें ? (२५)
यश्चिदापो महिना पर्यपश्यद्दक्षं दधाना जनयन्तीर्यज्ञम्.
यो देवेष्वधि देव ऽ एक ऽ आसीत् कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (२६)
जिन्होंने पृथ्वी के चारों ओर जल देखा, जिस ने यज्ञ धारण करने वालों को
३३० - यजुर्वेद