यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextउत्तरार्ध चौबीसवां अध्याय
श्वित्र आदित्यानामुष्ट्रो घृणीवान्वाध्रीणसस्ते मत्या ऽ अरण्याय सृमरो रूरू रौद्रः क्वयिः
कुटरुर्दात्यौहस्ते वाजिनां कामाय पिकः.. ( ३९)
आदित्यगणों के लिए विचित्र पशु, मति देवी के लिए ऊंट, चील और बकरे,
अरण्य देव के लिए गाय, रुद्र देव के लिए रुरु मृग व वाजि देव के लिए क्वयि, कौए
और मुरगे का विधान किया गया है. काम देव के लिए कोयल का विधान है. ( ३९ )
खड्गो वैश्वदेवः श्वा कृष्णः कर्णो गर्दभस्तरक्षुस्ते रक्षसामिन्द्राय सूकरः सि हो
मारुतः कृकलासः पिप्पका शकुनिस्ते शरव्यायै विश्वेषां देवानां पृषतः.. (४०)
वैश्वे देव के लिए गैंडे, राक्षसों के लिए कुत्ते, गधे और शेर, इंद्र देव के लिए
सुअर व मरु देव के लिए सिंह का विधान किया गया है. शरव्य देवी हेतु गिरगिट,
पपीहा और शकुनि तथा सभी देवों हेतु पृषत मृग का विधान है. ( ४० )
यजुर्वेद - ३११