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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 310 of 421

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Page 310

उत्तरार्ध चौबीसवां अध्याय
सूर्य के लिए बगुला पक्षी है. मित्र देव के लिए चातक, सृजय व शयांडक हैं.
सरस्वती देवी के लिए मैना, पृथ्वी देवी के लिए सेही पक्षी व मन्यु देव के लिए
सिंह, भेड़िया, सांप हैं. समुद्र के लिए मनुष्यवाची तोता पक्षी है. ( ३३ )
सुपर्णः पार्जन्य ऽ आतिर्वाहसो दर्विदा ते वायवे बृहस्पतये वाचस्पतये पैङ्गराजोलज ऽ
आन्तरिक्षः प्लवो मद्गुर्मत्स्यस्ते नदीपतये द्यावापृथिवीयः कूर्मः.. (३४)
पर्जन्य देव ( बादल ) के लिए गरुड़ पक्षी, वायु के लिए आती, वाहस तथा
काष्ठ कुट्ट हैं. वाणीपति बृहस्पति देव के लिए पैंगराज तथा काष्ठ कुट्ट हैं.
अंतरिक्ष के लिए अलज है. नदी देव के लिए मत्स्य वाहस तथा काष्ठ कुट्ट हैं.
स्वर्गलोक एवं पृथ्वीलोक के लिए कच्छप ( कछुआ ) है. ( ३४ )
पुरुषमृगश्चन्द्रमसो गोधा कालका दार्वाघाटस्ते वनस्पतीनां कृकवाकुः सावित्रो
ह १८ सो वातस्य नाक्रो मकरः कुलीपयस्तेकूपारस्य हियै शल्यकः.. (३५)
चंद्र देव हेतु नर हिरण, वनस्पति देव हेतु गोह कालका तथा कठफोड़ा, सविता
देव हेतु ताम्रचूर, वायु हेतु व समुद्र देव हेतु नक्र, मगरमच्छ एवं कुलीपय जलचर
निर्धारित किया गया है. ही देव हेतु सेही को निर्धारित किया गया है. ( ३५ )
एण्यह्नो मण्डूको मूषिका तित्तिरिस्ते सर्पाणां लोपाश ऽ आश्विनः कृष्णो रात्र्या ऽ ऋक्षो
जतूः सुषिलीका त ऽ इतरजनानां जहका वैष्णवी.. (३६)
अह्न हेतु हरिणी, सर्प हेतु मेढक, चुहिया तथा तीतर का विधान है.
अश्विनीकुमार हेतु लोपाश, रात्रि देवी हेतु कृष्ण मृग व अन्य देवगणों हेतु रीछ, जतू
और सुषिलीका का विधान है. विष्णु हेतु जहका निर्धारित है. ( ३६ )
अन्यवापोर्धमासानाम्ऋश्यो मयूरः सुपर्णस्ते गन्धर्वाणामपामुद्रो मासां कश्यपो
रोहित्कुण्डृणाची गोलत्तिका तेप्सरसां मृत्यवेसितः.. (३७)
अर्द्धमास हेतु अन्यवाय ( कोयल ), जलों के लिए ऋष्यमृग और मोर, गंधर्वों
के लिए सुपर्ण, जलों के लिए केकड़े, महीनों के लिए कछुए का विधान किया
गया है. अप्सराओं के लिए रोहित, कृंडृणाची व गोलत्तिका का विधान है. मृत्यु के
लिए काले हिरण का विधान किया गया है. ( ३७ )
वर्षाहूर्ऋतूनामाखुः कशो मान्थालस्ते पितॄणां बलायाजगरो वसूनां कपिञ्जलः कपोत
ऽ उलूकः शशस्ते निर्ऋत्यै वरुणायारण्यो मेषः.. (३८)
वर्षा को बुलाने वालों के लिए ऋतु, पितरों के लिए चूहे, छछूंदर तथा
छिपकली, बलदेव के लिए अजगर, वसुओं के लिए कपिंजल व निर्ऋति देव के
लिए कबूतर, उल्लू और खरगोश का विधान है. वरुण के लिए जंगली मेष का
विधान किया गया है. ( ३८ )
३१० - यजुर्वेद