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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 312 of 421

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Page 312

पच्चीसवां अध्याय
शादं दद्भिरवकां दन्तमूलैर्मृदं वस्वैस्तेगान्द १४ ष्ट्राभ्या १४ सरस्वत्या ऽ अग्रजिह्वं जिह्वाया
ऽ उत्सादमवक्रन्देन तालु वाज १४ हनुभ्यामप ऽ आस्येन वृषणमाण्डाभ्यामादित्याँ
श्मश्रुभिः पन्थानं भ्रूभ्यां द्यावापृथिवी वर्तोभ्यां विद्युतं कनीनकाभ्या १४ शुक्लाय स्वाहा
कृष्णाय स्वाहा पार्याणि पक्ष्माण्यवार्या ऽ इक्षवोवार्याणि पक्ष्माणि पार्या ऽ इक्षवः.. ( १ )
दांतों से शाद देवता ( कोमल घास ), दंतमूल ( दांत की जड़ ) से जल में
उपजने वाले शैवाल देव ( जल में उपजने वाली घास ) व दाढ़ों से मिट्टी व दाढ़ों
से तेग देव को प्रसन्न करते हैं. जिह्वा के आगे के भाग से सरस्वती देवी व उत्साद
देव को प्रसन्न करते हैं. तालु से अवक्रंद देव, ठोड़ी से अन्न देव, मुख से जल देव,
अंडकोषों से वृषण देव व दाढ़ीमूंछ से आदित्य देव को प्रसन्न करते हैं. भौंहों से
पंथ देव, बरौनियों से स्वर्गलोक व पृथ्वीलोक, आंख की पुतलियों से विद्युत् देव
को प्रसन्न करते हैं. शुक्ल देव के लिए स्वाहा. कृष्ण देव के लिए स्वाहा. पार देव
के लिए स्वाहा. अवार देव के लिए स्वाहा. ऊपर के लिए स्वाहा. नीचे के लिए
स्वाहा. ( १ )
वातं प्राणेनापानेन नासिके उपयाममधरेणौष्ठेन सदुत्तरेण प्रकाशेनान्तरमनूकाशेन बाह्यं
निवेष्यं मूर्ध्ना स्तनयित्नुं निर्बाधेनाशर्नि मस्तिक्येण विद्युतं कनीनकाभ्यां कर्णाभ्या १४
श्रोत्र १४ श्रोत्राभ्यां कर्णौ तेदनीमधरकण्ठेनापः शुष्ककण्ठेन चित्तं मन्याभिरदिति १४
शीर्ष्णा निर्ऋतिं निर्जर्जल्पेन शीर्ष्णा संक्रोशौः प्राणान् रेष्माण १४ स्तुपेन.. ( २ )
प्राण से वात देव के लिए स्वाहा. अपान से नासिका देव के लिए स्वाहा.
ऊपर के होंठ से सत् देव के लिए स्वाहा. ओष्ठ से उपयाम देव के लिए स्वाहा.
उत्तर के प्रकाश से अंतर देव के लिए स्वाहा. भीतर के प्रकाश से बाह्य देव
के लिए स्वाहा. मूर्धा से निवेश देव के लिए स्वाहा. सिर में स्थित अस्थि से
स्तनयित्नु देव के लिए स्वाहा. मस्तिष्क से अशनि देव के लिए स्वाहा. आंख की
पुतलियों से विद्युत् देव के लिए स्वाहा. कानों से श्रोत्र देव के लिए स्वाहा. दोनों
कानों से देवशक्ति देव के लिए स्वाहा. नीचे के कंठ से तेदनी देव के लिए
स्वाहा. ऊपर के सूखे कंठ से जल देव के लिए स्वाहा. नाड़ियों से चित्त देव
के लिए स्वाहा. सिर से अदिति देव के लिए स्वाहा. जर्जर सिर से निर्ऋति देव
३१२ – यजुर्वेद