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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 307 of 421

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Page 307

उत्तरार्ध चौबीसवां अध्याय
वरुण देव के लिए चितकबरे रंग के पशु मरुद्गण के लिए व सींगरहित पशु
प्रजापति के लिए हैं. ( १५ )
अग्नयेनीकवते प्रथमजानालभते मरुद्भ्यः सान्तपनेभ्यः सवात्यान्मरुद्भ्यो गृहमेधिभ्यो
बष्किहान्मरुद्भ्यः क्रीडिभ्यः स ᳪ सृष्टान्मरुद्भ्यः स्वतवद्भ्योऽनुसृष्टान्.. ( १६ )
पहले जन्मे पशु सेनापति जैसे अग्नि के लिए हैं. उत्तम तप करने वाले
मरुद्गणों के लिए वायु जैसे गतिमान पशु हैं. गृहमेध मरुद्गणों के लिए चिरप्रसूत
पशु हैं. क्रीड़ाकारी मरुद्गणों के लिए अच्छे गुणी पशु हैं. स्वप्रेरित मरुद्गणों के
लिए साथ रहने वाले पशु हैं. ( १६ )
उक्ताः सञ्चरा ऽ एता ऽ ऐन्द्राग्नाः प्राशृंगा माहेन्द्रा बहुरूपा वैश्वकर्मणाः... ( १७ )
ऊपर कहे गए संचरणशील पशु इंद्र देव एवं अग्नि के लिए हैं. प्रकृष्ट ( श्रेष्ठ )
सींग वाले पशु महेंद्र देव आदि के लिए हैं. बहुत से रंगों वाले विश्वकर्मा देव के
लिए हैं. ( १७ )
धूम्रा बभ्रुनीकाशाः पितृणा ᳪ सोमवतां बभ्रवो धूम्रनीकाशाः पितॄणां बर्हिषदां कृष्णा
बभ्रुनीकाशाः पितॄणामग्निष्वात्तानां कृष्णाः पृषन्तस्त्रैयम्बकाः.. ( १८ )
धुएं जैसे भूरे रंग के पशु पितरों के लिए हैं. धुएं और नेवले जैसे भूरे रंग के
सोम गुणों वाले पशु पितरों के लिए हैं. काले और भूरे रंग के कुश के आसन पर
बैठे पशु पितरों के लिए हैं. अग्नि विद्या में निपुण पशु पितरों के लिए हैं. काले रंग
के चकत्तेदार पशु पितरों के लिए हैं. ( १८ )
उक्ताः सञ्चरा ऽ एताः शुनासीरीयाः श्वेता वायव्याः श्वेताः सौर्याः... ( १९ )
उपर्युक्त पशुओं के साथ ही संचरणशील पशु शुनासीर के लिए हैं. सफेद
रंग के पशु वायु देव के लिए हैं. सफेद आभा वाले पशु सविता देव के लिए
हैं. ( १९ )
वसन्ताय कपिञ्जलानालभते ग्रीष्माय कलविङ्कान्वर्षाभ्यस्तित्तिरीञ्छरदे वर्तिका
हेमन्ताय ककराञ्छिशिराय विककरान्.. ( २० )
वसंत ऋतु के लिए चातक, गरमी के लिए चटक व वर्षा के लिए तीतर का
निर्धारण किया गया है. लवा शरद ऋतु, ककर व शिशिर ऋतु हेतु विककर पक्षियों
का निर्धारण किया गया है. ( २० )
समुद्राय शिशुमारानलभते पर्जन्याय मण्डूकान्द्भ्यो मत्स्यान्मित्राय कुलीपयान्वरुणाय
नाक्रान्.. ( २१ )
समुद्र हेतु अपने ही बच्चों को मारने वाले पक्षी का निर्धारण किया गया है.
यजुर्वेद - ३०७