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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 308 of 421

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Page 308

उत्तरार्ध चौबीसवां अध्याय
बादल हेतु मंडूक का निर्धारण किया गया है. जलों के लिए मत्स्य, मित्र देव
हेतु कुलीपय तथा वरुण देव के लिए नाक्र नामक पशु का निर्धारण किया गया
है. ( २१ )
सोमाय ह १४ सानालभते वायवे बलाका ऽ इन्द्राग्निभ्यां क्रुञ्चान्मित्राय मद्गून्र्वरुणाय
चक्रवाकान्.. (२२)
सोम के लिए हंस पक्षी, वायु के लिए बगुली. इंद्र देव और अग्नि के लिए
सारस, मित्र देव के लिए क्रौंच तथा वरुण देव हेतु चकवे का विधान किया गया
है. ( २२ )
अग्नये कुटरूनालभते वनस्पतिभ्य ऽ उलूकानग्नीषोमाभ्यां चाषानश्विभ्यां
मयूरान्मित्रावरुणाभ्यां कपोतान्.. (२३)
अग्नि के लिए मुरगे व वनस्पतिदेव के लिए उल्लू व अग्नि और सोम हेतु
नीलकंठ पक्षी का विधान मिलता है. अश्विनी देवों के लिए मोर व वरुण देव के
लिए कबूतर पक्षी का विधान मिलता है. ( २३ )
सोमाय लबानालभते त्वष्ट्रे कौलीकानघोषादीर्देवानां पत्नीभ्यः कुलीका
देवजामिभ्योग्नये गृहपतये पारूष्णान्.. (२४)
सोम के लिए लबा, त्वष्टा के लिए बया व देव पत्नियों के लिए घोष आदि
गुह्यतल पक्षी का विधान मिलता है. देवताओं की बहनों के लिए कुलीक व गृहपति
हेतु पारूष्ण का विधान मिलता है. ( २४ )
अह्ने पारावतानालभते रात्र्यै सीचापूरहोरात्रयोः सन्धिभ्यो जतूर्मासेभ्यो
दात्यौहान्त्संवत्तराय महतः सुपर्णान्.. (२५)
दिन के लिए कबूतर और रात्रि के लिए सीचापू का विधान मिलता है. दिन
तथा रात की संधि हेतु चमगादड़, मास हेतु कौए व वर्ष हेतु अच्छे पंख वाले
( गरुड़ ) का विधान मिलता है. ( २५ )
भूम्या ऽ आखूनालभतेन्तरिक्षाय पाङ्क्त्रान्दिवे कशान्दिग्भ्यो
नकुलान्बभ्रुकानवान्तरदिशाभ्यः.. (२६)
भूमि के लिए चूहों व अंतरिक्ष के लिए पांत में उड़ने वालों का विधान मिलता है.
स्वर्ग के लिए कश व दिशाओं के लिए भूरे रंग के जंतु का विधान मिलता है. ( २६ )
वसुभ्य ऽ ऋश्यानालभते रुद्रेभ्यो रूरूनादित्येभ्यो न्यङ्कन्वश्वेभ्यो देवेभ्यः
पृषतान्त्साध्येभ्यः कुलुङ्गान्.. (२७)
वसुओं के लिए ऋष्य नामक हिरण व रुद्रगणों के लिए रुरु नामक हिरण का
३०८ - यजुर्वेद